1975 में पहली बार प्रपोजल लाया गया –
दिल्ली, 1 जनवरी 2026 – पेरिस इंटरनेशनल ओलम्पिक से शतरंज एशिया महाद्वीप के महासचिव ब्रह्मचारी कुलदीप शतरंज ने बताया कि भारत देश में खेल प्रशासन से जुड़ा नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 1 जनवरी 2026 से लागू हो गया है। इसके तहत केंद्र सरकार ने उन प्रावधानों को लागू कर दिया है, जिनसे नेशनल स्पोर्ट्स बोर्ड (NSB) और नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल (NST) के गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
नेशनल स्पोर्ट्स बिल को लाने की शुरुआत 1975 से हुई थी। लेकिन हर बार राजनीतिक कारणों के चलते यह बिल कभी संसद नहीं जा पाया था।
यह कानून पिछले साल 18 अगस्त 2025 को अधिसूचित किया गया था और ये एक्ट देश का अब तक का सबसे बड़ा खेल सुधार है।
इस बिल को 23 जुलाई 2025 को लोकसभा में पेश किया गया और 11 अगस्त 2025 को इसे वहां पारित कर दिया गया। इससे एक दिन बाद राज्यसभा ने दो घंटे से ज्यादा समय तक चली चर्चा के बाद इसे पारित कर दिया था।
पेरिस इंटरनेशनल ओलम्पिक से शतरंज एशिया महाद्वीप के महासचिव ब्रह्मचारी कुलदीप शतरंज ने बताया कि NSB में एक चेयरपर्सन और सदस्य होंगे नेशनल स्पोर्ट्स बोर्ड (NSB) और नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल (NST) का गठन भी आंशिक रूप से लागू होने के साथ शुरू हो जाएगा। NSB में एक चेयरपर्सन और सदस्य होंगे जिन्हें केंद्र सरकार नियुक्त करेगी, जिनके पास पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, स्पोर्ट्स गवर्नेस, स्पोर्ट्स लॉ और दूसरे संबंधित क्षेत्रों में खास जानकारी या प्रैक्टिकल अनुभव हो।
ये नियुक्तियां एक सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर की जाएंगी। एक्ट को धीरे-धीरे लागू करने का मकसद कानूनी स्पोर्ट्स गवर्नेस फ्रेमवर्क में आसानी से बदलाव सुनिश्चित करना है।
23 जुलाई 2025 को बिल पेश किया था –
23 जुलाई 2025 को लोकसभा में नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल 2025 पेश किया था। इस बिल में खेलों के विकास के लिए नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बॉडी, नेशनल स्पोर्ट्स बोर्ड, नेशनल खेल इलेक्शन पैनल और नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल बनाने के प्रावधान हैं। संसद में इस बिल को GPC में भेजने की मांग भी उठी है।
1975 से शुरुआत हुई –
पेरिस इंटरनेशनल ओलम्पिक से शतरंज एशिया महाद्वीप के महासचिव ब्रह्मचारी कुलदीप शतरंज ने बताया कि नेशनल स्पोर्ट्स बिल को लाने की शुरुआत 1975 में हुई थी। लेकिन राजनीतिक कारणों से यह कभी संसद तक नहीं पहुंच सका था। 2011 में नेशनल स्पोर्ट्स कोड बना, जिसे बाद में बिल में बदलने की कोशिश हुई, लेकिन वह भी अटक गया। अब 2036 ओलिंपिक की बोली लगाने की तैयारी के तहत खेल प्रबंधन में पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय स्तर की व्यवस्था लाने के लिए इसे लाया गया है।









