टिकट बेचने की बात पर पूर्व विधायक से अभद्रता

पूर्व सांसद और वर्तमान विधायक के समर्थकों में जमकर धक्का मुक्की

भारत सारथी/ कौशिक

नारनौल। शहर में शुक्रवार को स्थानीय एक निजी फॉर्म हाउस पर आयोजित कांग्रेस के कार्यकर्ता सम्मेलन में भारी हंगामा हो गया। भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट के कांग्रेस कोऑर्डिनेटर बजरंगदास गर्ग के सामने पूर्व सांसद श्रुति चौधरी और विधायक राव दान सिंह के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। कार्यकर्ताओं में काफी धक्का मुक्की हुई। इससे पूर्व‌ पंडित राधेश्याम द्वारा संबोधन के टिकट बेचे जाने के आरोप को लेकर होहल्ला हुआ। पूर्व विधायक के साथ श्रुति चौधरी के लोगों ने अभ्रदता की। अंत में बजरंगदास गर्ग ने कार्यकर्ताओं को बड़ी मुश्किल से शांत किया। कांग्रेसियों के बीच यह कोई पहला मामला नहीं है जब उन्होंने आपसी मतभेदों को इस सार्वजनिक किया हो। 2014 की महेंद्रगढ़ रैली में किरण चौधरी और राव दान सिंह के समर्थकों के बीच वाद विवाद हुआ था। छह माह पूर्व ही नारनौल में जिलाध्यक्ष को लेकर हुई बैठक में भी काफी कहा सुनी हुई थी। यही क्रम रहा तो वर्चस्व की इस लड़ाई से आगामी चुनाव में कांग्रेस को काफी नुकसान हो सकता है।

लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर रेवाड़ी रोड स्थित एक निजी फार्म हाउस में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जिला स्तरीय सम्मेलन एक मार्च को आयोजन किया गया । सम्मेलन में भिवानी- महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले पूर्व विधायक, प्रभारी, पूर्व सांसद व वर्तमान विधायक समेत टिकट कई अभिलाषा रखने वाले कई नेता पहुंचे तथा कार्यकर्ता पहुंचे।

*कार्यकर्ता सम्मेलन में जैसे ही भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट के कोऑर्डिनेटर बजरंगदास पहुंचे तो पूर्व सांसद श्रुति चौधरी व महेंद्रगढ़ के विधायक राव दान सिंह के समर्थकों ने जोर-जोर से नारेबाजी शुरू कर दी। इससे पहले जब पंडित राधेश्याम शर्मा ने संबोधन में गत चुनाव में नांगल चौधरी टिकट बेचने का अप्रत्यक्ष आरोप लगाया और कहा कि इस बार भी ऐसा हुआ तो वह खुलकर मुखालफत करेंगे। इसके बाद श्रुति चौधरी के समर्थकों ने काफी शोरगुल किया अपितु श्रुति चौधरी के तीन समर्थकों ने पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा से अभद्रता तक की। इसमें सबसे ज्यादा मुखर देवेंद्र हुडीना और हरदीप मांदी तथा श्रूर्ति चौधरी का एक ओर समर्थक रहे। मर्यादाओं की सारी सीमाएं लांघी गई। यद्यपि पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा ने किसी का नाम नहीं लिया और अप्रत्यक्ष रूप से हमला किया था फिर भी श्रुति चौधरी के उपरोक्त तीन लोगों व्यवहार उचित नहीं कहा जा सकता। भले ही राधेश्याम शर्मा ने टिकट में मिलने पर विरोध करने की खुली धमकी दी हो पर एक उम्र दराज व्यक्ति के साथ ऐसा व्यवहार अपेक्षित नहीं।

इसके बाद राव दान सिंह के संबोधन पर दौरान कार्यकर्ता अपने-अपने नेताओं के समर्थन में नारेबाजी लगाते हुए मंच पर पहुंच गए, जहां पर दोनों गुटों में हाथापाई की नौबत आ गई।

5 मिनट तक यह धक्का मुक्की चलती रही। मंच संचालक में दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं को समझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन वो नहीं माने। अंत में कोऑर्डिनेटर बजरंगदास गर्ग ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहां की कांग्रेस पार्टी उनका नाम परिवार है और परिवार के सदस्य कभी भी आपस में लड़ते-झगड़ते नहीं। उनकी इस अपील के बाद ही कार्यकर्ता बमुश्किल शांत हुए।

यहां बता दे कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आपसी विवाद सार्वजनिक होना यह कोई पहली घटना नहीं है। अतीत में 2014 के चुनाव से पूर्व महेंद्रगढ़ में कांग्रेस की एक जनसभा आहूत थी जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा वह अन्य बड़े नेता भी थे। वहां तत्कालीन सीपीएस राव दान सिंह और तत्कालीन मंत्री किरण चौधरी के बीच विवाद हुआ था। किरण चौधरी ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा की उपस्थिति में खुलेआम कहा था कि वह डरने वाली नहीं है और उन्होंने राव दान सिंह पर आरोप लगाए थे।

लगभग छह माह पूर्व जब नारनौल में जिला अध्यक्ष को लेकर कार्यकर्ताओं का सम्मेलन था तब भी नेताओं के बीच आपसी वाद विवाद खुलकर हुआ था और जमकर नारेबाजी हुई थी। इससे पूर्व नारनौल में ही महेंद्रगढ़ रोड़ पर पूर्व मंत्री राव नरेंद्र सिंह यादव और किरण चौधरी के समर्थकों में भी वाद विवाद हुआ था।

इस वाद विवाद को इस दृष्टि से भी देखा जा रहा है कि राव दान सिंह ने गुरुग्राम सीट के साथ महेंद्रगढ़ भिवानी सीट पर भी दावेदारी जताई है और वह अतीत से भिवानी महेंद्रगढ़ सीट पर अपने को स्थापित करने का प्रयास करते रहे हैं जो श्रुति चौधरी और किरण चौधरी को रास नहीं आ रहा। उधर एसकेएस गुट में शामिल किरण चौधरी अपनी पुत्री की राह में हुड्डा गुट द्वारा रोड़े बिछाने का आरोप लगाती है। श्रुति चौधरी और उनकी माता किरण चौधरी पर गत चुनाव में नांगल चौधरी की टिकट राजाराम गोलवा को देने पर भी विवाद है। पूर्व विधायक और नांगल चौधरी सीट से दावेदार पंडित राधेश्याम शर्मा गाहे बगाहे इस मामले को पार्टी मंच पर अक्सर उठाते रहे हैं।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यदि कांग्रेस हाई कमान ने इस गुटबाजी पर अंकुश नहीं लगाया तो आगामी लोकसभा में विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस को दक्षिण हरियाणा में काफी क्षति पहुंचाने की संभावना है। हरियाणा में दो गुट खुलेआम हैं, एक एसकेएस दूसरा भूपेंद्र सिंह हुड्डा का। लेकिन यह सर्वविदित है कि वर्चस्व की इस होड़ में कांग्रेस का भट्टा बैठना तय है।

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