-कमलेश भारतीय

हरियाणा में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की दूसरे चरण के बाद विदाई हो गयी । खुद राहुल गांधी हरियाणा कांग्रेस नेताओं के प्रदर्शन से गद्गगद् हैं , इसके कोई संदेह नहीं । मेवात हो यानी दक्षिण हरियाणा हो या पानीपत यानी उत्तरी हरियाणा दोनों में भीड़ जुटी और विभिन्न वर्गों से राहुल ने संवाद किया , कुछ राह चलते और कुछ टिक कर , बैठ कर । इनमें सैनिक , खिलाड़ी, महिलायें , किसान और युवा खासतौर पर शामिल रहे । कुछ हद तक कांग्रेस नेता फोटो के लिये , टिकट की दौड़ के लिए भी दौड़कर राहुल के साथ कदम मिलाते दिखे । कुछ हद तक राहुल के साथ योगेन्द्र यादव भी लगातार चल रहे हैं लेकिन यह अभी तक भेद बना हुआ है कि क्या वे कांग्रेस में शामिल हो गये या अभी यात्रा में ही सहयोग कर रहे हैं ? उन्हें पहले आप और केजरीवाल से बहुत आशायें थीं लेकिन फिर मोहभंग हुआ और स्वराज इंडिया का गठन कर अलग हो गये । हरियाणा के मूल निवासी हैं और दक्षिण हरियाणा से संबंध रखते हैं । दूरदर्शन पर चुनाव विश्लेषक की भूमिका में खूब चर्चित रहे । किसान आंदोलन में भी सक्रिय रहे । अब यात्रा में है-क्या कांग्रेस में विधिवत शामिल होंगे ? वैसे राकेश टिकैत भी कदम मिलाने आये लेकिन उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं दिखे ?

इधर कांग्रेस की बात कर लें । पहले चरण में पहले ही दिन किरण चौधरी और उनकी पुत्री श्रुति चौधरी मेवात में शामिल हुई थीं लेकिन बाकी दो दिन अस्वस्थ होने के कारण नहीं आईं । इस बार किरण चौधरी आईं लेकिन चोटिल होने पर यात्रा से दूरी बनानी पड़ी और इस बार श्रुति चौधरी अंत तक रहीं जोकि कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं । यह भी चर्चा रही लगातार कि नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा , उदयभान और दीपेंद्र हुड्डा ही मुख्य तौर पर आगे आगे दिखे । वैसे तो पूरी मेहनत और मैनेजमेंट भी इनकी रही लेकिन यह सवाल उठता रहा कि मंच से किरण चौधरी , रणदीप सुरजेवाला और शैलजा को संबोधन का मौका कब मिलेगा , अखिल अम्बाला तक आते आते शैलजा को मंच पर आमंत्रित किया गया । किरण चौधरी तो थी नहीं लेकिन श्रुति चौधरी की फोटो राहुल के साथ दिखी । ये सवाल इसलिए कि प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी की चर्चा यत्र तत्र सर्वत्र है । यह सवाल राहुल गांधी की प्रेस वार्ता में भी उठाये गये । बेशक जवाब टाले गये । इसीलिए तो विपक्ष बार बार कह रहा है कि पहले कांग्रेस जोड़ो, फिर भारत जोड़ो!

जहां तक राहुल गांधी की बात है तो आरएसएस पर ज्यादा आक्रामक दिखे । हाफ पैंट कह कर इन पर कटाक्ष किया , कुरूक्षेत्र में थे तो कौरव पांडव की बात भी आनी स्वाभाविक थी । अब कौन कौरव , कौन पांडव ? मीडिया को भी जगह जगह कोसने में कमी नहीं छोड़ी । लगाम किसके साथ है ? यह बार बार बताते रहे राहुल !

क्या इस यात्रा से कांग्रेस हरियाणा में मजबूत हुई ? इसके जवाब में राहुल का कहना था कि इसमें कोई शक नहीं कि हरियाणा में कांग्रेस सत्ता में आ रही है । यह भविष्यवाणी कही जा सकती है । लेकिन क्या कांग्रेस में गुटबाजी खत्म होगी ? इस पर कोई भविष्यवाणी नहीं ! यात्रा अब हरियाणा में सफलता के साथ साथ अनेक शंकाएं , चर्चायें और गलियारों में अफवाहें छोड़कर आगे निकल गयी है । फिर भी न महिला कोच की बात आई और न ही हिसार दूरदर्शन की ।
कारवां गुजर गया
गुबार देखते रहे ,,,,,
-पूर्व उपाध्यक्ष, हरियाणा ग्रंथ अकादमी ।

error: Content is protected !!