टूटे चावल के निर्यात पर रोक लगाने और गैर बासमती चावल के निर्यात पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने का फैसला किसान विरोधी है
केंद्र सरकार द्वारा चालू खरीफ सत्र में धान की फसल का रकबा घटने और घरेलू आपूर्ति बढ़ाने का हवाला देने का तर्क बेबुनियाद
सच्चाई यह है कि भाजपा सरकार किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर करना चाहती है

चंडीगढ़, 12 सितंबर: इनेलो के प्रधान महासचिव एवं ऐलनाबाद के विधायक अभय सिंह चौटाला ने भाजपा की केंद्र सरकार द्वारा टूटे चावल के निर्यात पर रोक लगाने और गैर बासमती चावल के निर्यात पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने के फैसले को किसान विरोधी कदम बताते हुए कहा कि सरकार के इस कदम से देश का किसान वैश्विक बाजार में खाद्यान्न की उच्च कीमतों का लाभ लेने से वंचित हो जाएगा। इससे पहले मई महीने में केंद्र की सरकार ने गेहूं के निर्यात पर भी रोक लगा दी थी जिससे किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतों में हुई वृद्धि का लाभ नहीं मिल पाया था।

इनेलो नेता ने केंद्र सरकार द्वारा चालू खरीफ सत्र में धान की फसल का रकबा घटने और घरेलू आपूर्ति बढ़ाने का हवाला देकर टूटे चावल के निर्यात पर रोक और गैर-बासमती चावल पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने के तर्क को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि सच्चाई यह है कि भाजपा सरकार किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर करना चाहती है और लगातार किसान विरोधी फैसले ले रही है। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौरान जहां सभी उद्योग ठप्प पड़ गए थे और रोजगार खत्म हो गए थे तब कृषि ही एक ऐसा क्षेत्र था जिसने देश की जीडीपी को बचाए रखा था।

भाजपा सरकार ने किसानों की जमीनों को हड़प कर अडानी जैसे बड़े उद्योगपतियों को देने के लिए तीन काले कृषि कानूनों को बनाया था लेकिन देश का अन्नदाता उन कानूनों के खिलाफ लामबंद हुआ और केंद्र की भाजपा सरकार को काले कानूनों को वापिस लेने को मजबूर कर दिया था उसी का बदला लेने के लिए भाजपा सरकार लगातार किसानों को कमजोर करने की साजिश रच रही है। भाजपा सरकार तुरंत टूटे चावल के निर्यात पर रोक लगाने और गैर बासमती चावल के निर्यात पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने के फैसले को वापिस ले।

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