-कमलेश भारतीय

हरियाणा में हुए राज्यसभा चुनाव में अजय माकन की हार को अभी तक कांग्रेस पचा नहीं पा रही है । जब बड़ी आसानी से जीत सकते थे निर्दलीय प्रत्याशी कार्तिकेय शर्मा से तो फिर, हारे कैसे ? यह अबूझ पहेली अभी तक सुलझी नही है । एक वोट कुलदीप बिश्नोई का खुल्लम-खुल्ला विरोध में था और उनकी अंतरात्मा चीख चीख कर कह रही थी कि मैं कांग्रेस के साथ नहीं हूं । मैं काग्रेस प्रत्याशी को वोट नहीं करूंगा यह रट थी कुलदीप बिश्नोई की । इसके बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी बड़ी आसानी से जीत सकते थे , यदि एक वोट रद्द नहीं होता । इस अप्रत्याशित हार के बाद यह चर्चा लगातार उठी कि कौन है जिसका वोट रद्द हुआ ? कभी किसी की ओर तो कभी किसी की ओर उंगली उठती रही और आखिर किरण चौधरी पर जाकर ठहर गयी । किरण चौधरी इस बात से आगबबूला हैं कि सात सात बार वोट डाली है तो क्या मुझे वोट डालना नहीं आता । अब वे यह भी कह रही हैं कि मै सिर्फ सिर्फ सोनिया गांधी को जवाबदेह हूं और किसी को नहीं पर उनकी एक टिक की चर्चा हो रही है जिससे माकन हार गये । अब माकन ने एक तरफ तो इस चुनाव के खिलाफ कोर्ट में अर्जी लगाई है , दूसरी तरफ हरियाणा के प्रभारी विवेक बंसल पर भी अपना गुस्सा निकाला है कि उन्होंने अपनी भूमिका ठीक नहीं निभाई है । इस तरह कांग्रेस के अंदर मचा आसान अभी तक खत्म नहीं हुआ । कब तक चलेगा और इसका क्या अंत होगा , यह पूरा हरियाणा जानने के लिए उत्सुक है ।

इधर हरियाणा कांग्रेस के एक विधायक सुरेंद्र पवार ने भी अचानक विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता को अपना इस्तीफा ईमेल कर सनसनी फैला दी और लगा कि काग्रेस के दो विकेट गिरने वाले हैं-यानी कुलदीप बिश्नोई तो जा भी रहे है , अब सुरेंद्र भी चले । कुलदीप के बारे में तो कहा जा रहा है कि वे अंतरात्मा की दूसरी पुकार के चलते अभी कांग्रेस में रुके हुए थे यानी राष्ट्रपति चुनाव में भी तो कांग्रेस के खिलाफ वोट कर अपने अपमान का बदला लेना था । अब यह बदला पूरा हुआ और इनके भाजपा में जाने का रास्ता साफ । आने वाले दिनों मे ये कमल का फूल और पटका पहने नजर आयेंगे । पर सुरेंद्र पवार को अचानक क्या हुआ ? वे कह रहे हैं की मेरे परिवार को धमकियां मिल रही हैं और सरकार कोई कदम नहीं उठा रही । खैर , भूपेंद्र सिह हुड्डा ने कमान संभाली -समझाया बुझाते विधानसभा अध्यक्ष के पास ले गये और इस्तीफा वापिस करवाया । कांग्रेस की जान में जान आई । विधायक बचा , लाखों पाये ।

अब तैयार रहिए मंडी आदमपुर के उपचुनाव के लिए ।
-पूर्व उपाध्यक्ष, हरियाणा ग्रंथ अकादमी ।

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