चंडीगढ़, 15 फरवरी 2021 । 3 नए कृषि कानूनों के विरुद्ध हरियाणा भारतीय किसान यूनियन के सभी गुट भी संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर के नीचे जंग लड़ रहे हैं. आंदोलन के आरंभ में मोर्चा के नेता अपने-अपने लीडरों और यूनियनों के बैनर लगाते थे. परंतु अब ऐसा नहीं है. संयुक्त मोर्चा का बैनर इंद्री की महापंचायत में लगाया गया. इस बैनर में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी, बलबीर सिंह राजेवाल की फोटो लगाई गई. अब किसानों का उद्देश्य गुटबाजी को भूलकर किसानों की इस लड़ाई को मजबूती से लड़ना है और हर कीमत पर काले कृषि कानूनों को वापस करवाना है.

हरियाणा के लोगों ने 20 मिनट में पलटी बाजी

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि भारत सरकार रोटी को तिजोरी की वस्तु बनाना चाहती है, परंतु हम रोटी को तिजोरी की वस्तु बनने नहीं देंगे. राकेश टिकैत के अनुसार हरियाणा के लोग सबसे अधिक लड़ाकू हैं. 26 जनवरी की घटना के पश्चात आंदोलन टूटने की कगार पर आ गया था, परंतु 20 मिनट में ही हरियाणा के लोगों ने बाजी पलट दी.

आंदोलन को दोबारा से बलशाली बनाने में सबसे अधिक हरियाणा का योगदान

पंजाब के किसान नेता राजेवाल ने 26 जनवरी की घटना के पश्चात हरियाणा के युवाओं के संबंध में बयान जारी किया था कि हरियाणा के मुंडे बड़े लोगों की बातें नहीं मानते हैं. अब उन्होंने इंद्री की पंचायत में हरियाणा की प्रशंसा की. राजेवाल ने कहा कि 26 जनवरी की इस घटना के पश्चात कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था. हमें लग रहा था कि यह किसान आंदोलन पूरी तरह से टूट जाएगा.

हमें इतना बड़ा सदमा लगा था कि 3 घंटे की मीटिंग के पश्चात भी हम कोई फैसला नहीं ले पा रहे थे. परंतु हरियाणा की बहादुर जनता ने हमें इतना सहयोग दिया कि आंदोलन फिर से बलशाली हो गया है. इसमें सबसे बड़ा योगदान हरियाणा का ही है.

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