बिना तालमेल के विकास में हो रहा है घालमेल.
बिजली के पोल शिफ्ट करना सबसे बड़ी चुनौती.
पटौदी के एसडीएम ने दिए आवश्यक सख्त निर्देश

फतह सिंह उजाला

पटौदी । जब भी विकास योजनाएं बनती हैं , तो विभिन्न विभागों के अधिकारियों के बीच में एक बार संबंधित समस्याओं को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक बात है । अब यह चर्चा हुई , या फिर नहीं हुई , संबंधित विभागों के बीच में कोई तालमेल बना या नहीं बनाया गया । यह तो एक प्रकार से बंद मुट्ठी की ही तरह से है ।

लेकिन लाख टके का सवाल यही है कि यह कैसा विकास, जिसमें संबंधित विभाग अपनी-अपनी ढपली और अपना अपना राग ही अलाप रहे हैं । कुछ दिन पहले ही पटौदी के एसडीएम ने मार्केट कमेटी कार्यालय परिसर में पटौदी के एमएलए सत्यप्रकाश जरावता के खुले दरबार में विशेष रुप से बिजली निगम, जलापूर्ति एवं अभियांत्रिकी विभाग के साथ-साथ पालिका प्रशासन के अधिकारियों को सख्त आदेश देते हुए सीआरपीसी की धारा 133 से लेकर 145 तक का पाठ भी सार्वजनिक रूप से पढ़ाया था। लेकिन लगता है अधिकारियों को इस पाठ और 133 से लेकर 135 सीआरपीसी की धारा में कोई ना रुचि है और नहीं होने वाली संबंधित कार्रवाई का किसी प्रकार का डर है ।

हेलीमंडी नगर पालिका क्षेत्र में इन दिनों रामपुर गेट से लेकर रामपुर चैराहे रेलवे ओवर ब्रिज के पास तक मार्केट के दोनों तरफ पूरा अतिक्रमण साफ करके सीसी रोड बनाने की योजना पर काम युद्धस्तर पर चल रहा है । पालिका प्रशासन ने वर्क आर्डर जारी कर दिया और ठेकेदार ने भी युद्ध स्तर पर अपना काम रात दिन 24 घंटे जारी रखा हुआ है । इस बीच आम लोगों में चर्चा है कि इस प्रकार के करोड़ों रुपए के बड़े प्रोजेक्ट अथवा विकास कार्य बरसात के समय या फिर मानसून के दौरान ही क्यों किए जाते हैं ? यह भी आम लोगों के मुताबिक अपने आप में बहुत बड़ा रहस्यमई सवाल है ?

अब बात करते हैं की जिस भी एरिया में यह काम किया जा रहा है वहां पर कम से कम आधा दर्जन हाईटेंशन बिजली के पोल लगे हुए हैं । बताया गया है कि जो अब सीसी रोड बनाया जाना है , वह करीब 60 फुट चैड़ाई में होगा और इसकी लंबाई लगभग 100 मीटर के आसपास भी या इससे अधिक हो सकती है । ठेकेदार ने रात दिन जेसीबी चला कर के दोनों तरफ के अतिक्रमण को ध्वस्त करते हुए बीच के पूरे रोड को उखाड़ दिया और इस रोड पर लगी हुई टाइलें भी कहां डाली गई कहां नहीं डाली गई यह भी एक रहस्य बना हुआ है । कथित रूप से जो भी यहां से मलबा टाइलों के साथ में निकला वह विभिन्न वार्डों में लेबल किया जाने के काम में खपा दिया गया है ।

अब सवाल यह है कि पालिका सचिव पालिका एमई पालिका जई का ध्यान इस तरफ क्यों नहीं गया , कि लगभग 60 फुट चैड़े बनाए जाने वाले सीसी रोड के दायरे में आने वाले हाईटेंशन बिजली के पोल को भी शिफ्ट करवाना जरूरी है । इसके लिए समय रहते पटौदी बिजली निगम से कोई संपर्क नहीं किया गया। यह मामला जब पटौदी के एसडीएम राजेश कुमार प्रजापत के संज्ञान में लाया गया तो वह शुक्रवार को मौके पर पहुंचे उन्होंने सारे हालात का जायजा लिया और जायजा लेने के साथ ही बिजली निगम, जलापूर्ति एवं अभियांत्रिकी विभाग सहित पालिका प्रशासन को भी सख्त निर्देश दिए कि काम में किसी प्रकार की कोताही ना हो और ना ही किसी की शिकायत आनी चाहिए कि काम सही प्रकार से नहीं हुआ या फिर अन्य कोई अड़चन बाकी रह गई है । उन्होंने बिजली निगम अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि बिजली हाईटेंशन आपूर्ति के पोल को शिफ्ट करने की व्यवस्था की जाए । वहीं उन्होंने पालिका प्रशासन से यह भी जानना चाहा कि रोड के दोनों तरफ जो मार्केट दुकानें हैं उनके सामने कितने दायरे में पटरी अथवा फुटपाथ बनाया जा सकता है ।

सवाल यह है कि बिजली के पोल तो शिफ्ट हो जाएंगे , लेकिन सबसे बड़ा चुनौती उस बिजली के पोल को शिफ्ट करना है जो कि रामपुर गेट पर यहां बिजली ट्रांसफार्मर के साथ ही लगा हुआ है। इस बिजली के पोल से अनाज मंडी के अंदर बिजली की आपूर्ति हो रही है और यह बिजली का पोल ऐसे स्थान पर लगा है कि इसे अपने स्थान से बिजली ट्रांसफार्मर की तरफ शिफ्ट किया ही नहीं किया जा सकता । क्योंकि साथ में ही महल 10 से 15 फुट के दायरे में संकरा रोड है और यहां दोनों तरफ मार्केट बनी हुई है। ऐसे में 11000 बोल्ट के हाईटेंशन तार को घुमा-फिरा कर बीच बाजार में ले जाना अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती है । जो भी यहां पर भवन बने हैं उन भवन के ऊपर से भी इन हाईटेंशन तारों को नहीं ले जाया जा सकता ।

अब यह आने वाला समय ही बताएगा कि किस प्रकार से तीनों विभाग मिलकर इस समस्या का समाधान कर सकेंगे । लेकिन आम आदमी  जिनके आवास और प्रतिष्ठान सड़क के दोनों तरफ हैं , उनके पेयजल आपूर्ति पाइप , सीवरेज के पाइप को नए सिरे से लगाना पड़ रहा है । यदि यह सब योजना समय रहते संबंधित विभागों के अधिकारियों के बीच में एक दो बैठक करके विचार विमर्श कर इनका समाधान भी निकाल लिया जाता तो संभव है कि पटौदी के एसडीएम राजेश कुमार प्रजापत को भी शायद दखल नहीं देना पड़ता ।  काम सुचारू रूप से चलता रहता , वहीं आम लोगों का जो नुकसान हुआ उससे भी लोग बस सकते थे।

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