एक ही पैन नंबर पर हजारों रजिस्ट्रियों के दावे पर उठाए सवाल, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग
चंडीगढ़, 15 अक्टूबर। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने गुरुग्राम की बादशाहपुर तहसील में संपत्ति रजिस्ट्रियों से जुड़ी कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि संपत्ति पंजीकरण के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर विसंगतियों की आशंका प्रशासनिक व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सरकार को मामले के तथ्य सार्वजनिक कर जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
जारी प्रेस बयान में राव नरेंद्र सिंह ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि बादशाहपुर तहसील में करीब 35 हजार संपत्ति लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड पर सवाल उठे हैं। इनमें एक ही पैन नंबर का लगभग 25 हजार रजिस्ट्रियों में इस्तेमाल होने तथा करीब 55 हजार करोड़ रुपये के संपत्ति लेन-देन से संबंधित रिकॉर्ड में विसंगतियों की बात कही गई है।
सत्यापन व्यवस्था पर उठाए सवाल
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि यदि एक ही संदिग्ध पैन नंबर हजारों रजिस्ट्रियों में दर्ज हुआ है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित अधिकारियों और विभागीय तंत्र ने समय रहते इसे क्यों नहीं पकड़ा। खरीदार और विक्रेता की पहचान, दस्तावेजों का सत्यापन तथा वित्तीय लेन-देन का सही रिकॉर्ड सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में कथित गड़बड़ियों के कारणों और निगरानी व्यवस्था की जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आम लोग अपनी मेहनत की कमाई से जमीन और मकान खरीदते हैं तथा रजिस्ट्री को अपने स्वामित्व की कानूनी सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार मानते हैं। पंजीकरण रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठने से लोगों में चिंता पैदा होना स्वाभाविक है। सरकार और संबंधित विभागों को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
पंजीकरण रिकॉर्ड और अधिकारियों की भूमिका की जांच हो
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मांग की कि बादशाहपुर तहसील के पिछले वर्षों के संपत्ति पंजीकरण रिकॉर्ड, पैन नंबरों के सत्यापन, आयकर विभाग को भेजी गई सूचनाओं और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच कराई जाए। जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि हजारों रजिस्ट्रियों में एक ही पैन नंबर कैसे दर्ज हुआ और वित्तीय लेन-देन संबंधी सूचनाओं में कथित विसंगतियों के लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी बनती है।
उन्होंने कहा कि जांच में लापरवाही अथवा जानबूझकर नियमों की अनदेखी सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही पंजीकरण और सत्यापन व्यवस्था में ऐसी खामियों को दूर किया जाए, ताकि भविष्य में इनकी पुनरावृत्ति न हो।
जांच से पहले घोटाला कहना उचित नहीं
राव नरेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने से पहले मामले को साबित हो चुका घोटाला या कर चोरी करार देना उचित नहीं होगा। हालांकि, इतने बड़े मूल्य के संपत्ति लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड पर उठे सवालों को हल्के में भी नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनता को अपनी जमीन-जायदाद से जुड़े दस्तावेजों की सुरक्षा और पारदर्शिता के बारे में जानने का अधिकार है। सरकार निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई सामने लाए और जवाबदेही सुनिश्चित करे।








