विश्व संवाद केंद्र, कुरुक्षेत्र द्वारा नारद जयंती पर जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित, 40 से अधिक पत्रकार हुए सम्मानित।
थानेसर,प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 17 मई : विश्व संवाद केंद्र द्वारा नारद जयंती के अवसर पर जिला स्तरीय पत्रकार सम्मान एवं विचार गोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पत्रकारिता, सामाजिक चेतना एवं राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर गंभीर चिंतन हुआ। जिले भर से आए लगभग 40 पत्रकारों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं बुद्धिजीवियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को अत्यंत सफल एवं प्रभावशाली बनाया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. प्रीतम सिंह ने अपने विस्तृत उद्बोधन में कहा कि “पत्रकारिता केवल सूचनाओं का आदान- प्रदान नहीं, बल्कि समाज के मानस को गढ़ने वाली एक सचेत प्रक्रिया है।” उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब राजनीति लड़खड़ाती है, तब साहित्य और पत्रकारिता ही राष्ट्र को सही दिशा दिखाने का कार्य करती हैं।
उन्होंने कहा कि आज समाज को ऐसी पत्रकारिता की आवश्यकता है जो केवल ‘खबर’ देने तक सीमित न रहे, बल्कि समाज में सकारात्मक चेतना, नैतिकता एवं चरित्र निर्माण का कार्य भी करे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समाज परिवर्तन का अर्थ केवल व्यवस्था परिवर्तन नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण के माध्यम से संपूर्ण समाज की चेतना को जागृत करना है।
डॉ. प्रीतम सिंह ने संघ के पंच परिवर्तन विषयों सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन,पर्यावरण संरक्षण, ‘स्व’ आधारित बोध तथा नागरिक कर्तव्य – को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि पत्रकारिता इन सभी क्षेत्रों में जनजागरण का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है।
सामाजिक समरसता विषय पर उन्होंने कहा कि मीडिया को समाज में जाति, वर्ग एवं भाषा के आधार पर विभाजन बढ़ाने के बजाय एकात्मता और संवाद को प्रोत्साहित करना चाहिए। पत्रकारिता का धर्म समाज की दरारों को भरना है, उन्हें गहरा करना नहीं।
कुटुंब प्रबोधन पर उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक उपभोगवादी संस्कृति के प्रभाव से पारिवारिक मूल्य कमजोर हो रहे हैं। ऐसे समय में पत्रकारिता को परिवार, संस्कार, बुजुर्गों के सम्मान तथा सामूहिक जीवन की महत्ता को समाज के सामने लाना चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण विषय पर उन्होंने भारतीय संस्कृति की प्रकृति- केंद्रित जीवनशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्ति एवं पर्यावरण संतुलन जैसे विषय केवल समाचार न बनें,बल्कि जनआंदोलन का रूप लें। मीडिया इस दिशा में समाज को प्रेरित करने की महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
‘स्व’ आधारित बोध के संदर्भ में उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के अमृतकाल में हमें अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और स्वदेशी के प्रति गौरव का भाव विकसित करना होगा। भारतीय दृष्टि से समाज, इतिहास और विकास का विश्लेषण करने वाली पत्रकारिता ही राष्ट्र में आत्मविश्वास और स्वाभिमान का संचार कर सकती है।
नागरिक कर्तव्य विषय पर उन्होंने कहा कि अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति जागरूकता भी आवश्यक है। पत्रकारिता को नागरिकों को मतदान, यातायात नियमों के पालन, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं राष्ट्रहित के प्रति जागरूक करने का कार्य करना चाहिए।
कार्यक्रम में रणजीत, डॉ. संजय कौशिक, जिला के प्रचार प्रमुख डॉ. वीरेंद्र पाल, जिला के सह प्रचल प्रमुख सुनील और प्रचार टोली के सदस्य डॉ. संजीव ग्रेवाल, रविन्द्र पवार, सुशील, प्रदीप और अशोक वासुदेव विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने पत्रकारिता को राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बताते हुए सकारात्मक एवं मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर विभिन्न मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकारों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित पत्रकारों एवं अतिथियों ने नारद जयंती जैसे आयोजनों को समाज एवं पत्रकारिता जगत के लिए प्रेरणादायी बताया।








