ठीक-ठाक सड़कों पर पैसे बहाकर खानापूर्ति, गड्ढों में डूबा शहर: पंकज डावर

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– राजीव चौक की सही सड़क दोबारा बनाना “विकास” नहीं, जनता के पैसे की बर्बादी
– टूटी सड़कों की अनदेखी, जिम्मेदारों की नीयत और प्राथमिकताओं पर सवाल

गुरुग्राम। कांग्रेस के शहरी जिला अध्यक्ष पंकज डावर ने शहर में चल रहे सड़क निर्माण कार्यों पर तीखा और सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यह “विकास” नहीं, बल्कि खुलेआम संसाधनों की बर्बादी और प्रशासनिक नाकामी का जीता-जागता उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जिन सड़कों पर कोई समस्या नहीं है, उन्हें रातों-रात दोबारा बनाया जा रहा है, जबकि गड्ढों से भरी सड़कों पर चलना जनता के लिए रोज़ का संकट बना हुआ है।

डावर ने कहा कि एनएच-48 स्थित राजीव चौक फ्लाईओवर के पास की सड़क पूरी तरह ठीक थी—न कहीं गड्ढा, न कोई खुदाई—फिर भी उसे दोबारा बनाना किसी समझदार योजना का हिस्सा नहीं हो सकता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “या तो अधिकारियों को जमीन की हकीकत दिखती नहीं, या फिर वे जानबूझकर आंखें बंद किए बैठे हैं।”

उन्होंने प्रशासन और सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि गुरुग्राम में विकास के नाम पर सिर्फ दिखावा हो रहा है। “असलियत यह है कि शहर की सड़कों का हाल बद से बदतर है, लेकिन जिम्मेदार लोग आसान काम चुनकर अपनी फाइलें चमका रहे हैं। जहां असली काम करना चाहिए, वहां चुप्पी है।”

डावर ने कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। “जब ठीक सड़कों पर बार-बार काम होगा और खराब सड़कों को यूं ही छोड़ दिया जाएगा, तो संदेह होना लाजमी है कि कहीं न कहीं गड़बड़ जरूर है।”

उन्होंने शहर की कई बदहाल सड़कों का उदाहरण देते हुए कहा कि सिद्धेश्वर चौक से शिव मूर्ति चौक, न्यू कॉलोनी मोड़ से मदनपुरी-कादीरपुर मार्ग, सेक्टर-10 चौक और पटौदी चौक से बसई तक की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। “इन सड़कों पर चलना जोखिम भरा है, हादसे रोज़ की बात बन चुके हैं, लेकिन प्रशासन को कोई फर्क नहीं पड़ता।”

डावर ने कड़े शब्दों में कहा कि “जनता की परेशानी से बेखबर यह कार्यप्रणाली साफ दर्शाती है कि या तो जिम्मेदार लोग अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह फेल हो चुके हैं, या फिर जानबूझकर गलत प्राथमिकताएं तय की जा रही हैं।”

उन्होंने मांग की कि तुरंत प्रभाव से शहर की जर्जर सड़कों की मरम्मत करवाई जाए और विकास कार्यों में पारदर्शिता लाई जाए, वरना जनता अब चुप बैठने वाली नहीं है।

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Author: Bharat Sarathi

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