सेक्टर-14 आईडीसी में बदहाल हालात, अधूरे निर्माण से उद्योगों पर संकट

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सीवर खुदाई और टूटी सड़कों से बढ़ी परेशानी, समाधान न हुआ तो मुख्यमंत्री से मिलेंगे: धर्मसागर

गुरुग्राम, 4 मई 2026 – गुरुग्राम के औद्योगिक विकास की धुरी माने जाने वाले सेक्टर-14 आईडीसी क्षेत्र में इन दिनों हालात चिंताजनक बने हुए हैं। शहर की अर्थव्यवस्था को गति देने वाले उद्यमी ही अब बुनियादी समस्याओं से जूझने को मजबूर हैं। सीवर लाइन की खुदाई और सड़कों के अधूरे निर्माण कार्य ने पूरे औद्योगिक क्षेत्र को अव्यवस्था और परेशानी के भंवर में धकेल दिया है।

आईडीसी एसोसिएशन के प्रधान धर्मसागर ने प्रशासनिक उदासीनता पर तीखा असंतोष जताते हुए कहा कि कई बार संबंधित विभागों और आलाधिकारियों को समस्याओं से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे मुख्यमंत्री के समक्ष इस गंभीर मुद्दे को उठाने के लिए बाध्य होंगे।

उद्यमियों का कहना है कि जिस कार्य को समयसीमा के भीतर पूरा हो जाना चाहिए था, वह आज भी अधूरा पड़ा है। सीवर लाइन की खुदाई के बाद सड़कों की मरम्मत न होने से आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। जगह-जगह गड्ढे और उखड़ी सड़कों ने न केवल रोजमर्रा के कामकाज को बाधित किया है, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी कई गुना बढ़ा दिया है।

प्रधान धर्मसागर, उद्यमी सुनील दत्ता, विजय टंडन, देवेंद्र जैन, प्रवीण वर्मा और तरुण खन्ना सहित अन्य उद्योगपतियों ने बताया कि दोनों ओर से सड़कों को खोद देने के कारण रास्ते बेहद संकरे हो गए हैं। इससे भारी वाहनों की आवाजाही मुश्किल हो गई है और माल ढुलाई पर सीधा असर पड़ रहा है। बाहर से आने वाले प्रतिनिधिमंडलों और व्यापारिक साझेदारों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, जिससे क्षेत्र की औद्योगिक छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि श्रमिकों से लेकर प्रबंधन तक सभी को कार्यस्थल तक पहुंचने में दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। उत्पादन की गति प्रभावित हो रही है और समय पर डिलीवरी में बाधा आ रही है। उद्यमियों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो इसका सीधा असर उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ेगा।

आने वाले मानसून को लेकर भी उद्यमियों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया, तो बारिश के दौरान जलभराव की समस्या विकराल रूप ले सकती है। इससे औद्योगिक इकाइयों में पानी घुसने का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे मशीनरी और कच्चे माल को नुकसान हो सकता है।

उद्यमियों ने संबंधित विभागों से मांग की है कि निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाए और गुणवत्ता का भी विशेष ध्यान रखा जाए। उनका कहना है कि गुरुग्राम जैसे औद्योगिक केंद्र में इस प्रकार की लापरवाही न केवल उद्योगों के लिए हानिकारक है, बल्कि प्रदेश के समग्र आर्थिक विकास पर भी प्रतिकूल असर डाल सकती है।

स्पष्ट है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया, तो यह मामला केवल स्थानीय असंतोष तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उच्च स्तर तक पहुंचकर सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करेगा।

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Author: Bharat Sarathi

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