कनोह गांव से प्रदीप बूरा की गेहूं फसल जलने पर मुआवजे की मांग को लेकर किसान सभा शिष्टमंडल ने उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा

उकलाना, 20 अप्रैल । संयुक्त किसान मोर्चा, हरियाणा के आह्वान पर हिसार जिला की सभी मार्केट कमेटियों का घेराव किया। उकलाना में भी किसानों ने मंडी कार्यालय का घेराव किया व जमकर नारेबाजी की। अखिल भारतीय किसान सभा के प्रधान मा० फूल सिंह की अध्यक्षता में सुबह 11 बजे से उकलाना मंडी कार्यालय के मुख्य गेट पर तीन घंटे धरना एवं विरोध प्रदर्शन किया गया। संचालन डा० मियां सिंह बिठमड़ा ने किया। इस मौके पर किसानों ने बायोमेट्रिक प्रणाली तथा अन्य नई शर्तों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

किसान सभा जिला सचिव सरबत सिंह पूनिया ने कहा कि हरियाणा सरकार मंडियों में फसल बिक्री के लिए नए नियम जबरन लागू कर रही है, जो किसानों को परेशान करने की साजिश है। यह कदम मंडी व्यवस्था को खत्म करने की दिशा में उठाया गया है। ऑनलाइन पोर्टल और बायोमेट्रिक प्रणाली किसानों को सुविधाओं से वंचित करने का माध्यम बन रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन किसान विरोधी नियमों को तुरंत वापस नहीं लिया गया तो संयुक्त किसान मोर्चा बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होगा।
किसान सभा तहसील प्रधान मा० फूल सिंह व सह सचिव डा० मियां सिंह बिठमड़ा ने बिजली लाइनों में शॉर्ट सर्किट समेत अन्य कारणों से गेहूं की फसल में लग रही आग की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई और मांग की कि सरकार फसल नुकसान की भरपाई के लिए स्पष्ट और ठोस नीति बनाए।

किसान नेताओं ने कहा कनौह गांव के किसान प्रदीप बूरा की तीन एकड़ से अधिक गेहूं की फसल जलकर नष्ट हो गई। इस संबंध में किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने उकलाना तहसीलदार व बरवाला उप मंडल अधिकारी से मिला और ज्ञापन सौंपा। किसान नेताओं ने मांग की कि पीड़ित किसान को 55 हजार रुपये फसल मुआवजा तथा 5 हजार रुपये भूसे का मुआवजा तुरंत दिया जाए।
किसान नेताओं ने यह भी कहा कि बिजली का निजीकरण और स्मार्ट मीटर योजना किसानों पर जबरन थोपी जा रही है, जो दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान किए गए वादों के खिलाफ है।
प्रदर्शन में प्रमुख रूप से किसान सभा सचिव प्रदीप बूरा, कैशियर दयानंद ढुकिया, तहसील कमेटी नेता रमेश पूनिया, सोनू ढाका, इन्द्र सिंह पाबड़ा, ओमड़, सतबीर फरीदपुर, सतपाल खैरी, कृष्ण खैरी, सुरेश पूनिया, विरेंद्र नैन लितानी, सेसा, दर्शन गाजूवाला रामकुमार जांगड़ा, कुलदीप बूरा, बलवान सिंह, मेवा सिंह, संदीप, बलजीत, महीपाल, सत्यवान, राजा आदि अनेक नेताओं ने सरकार की किसान मजदूर विरोधी नीतियों की जमकर आलोचना की।








