अप्रैल में ही 40 डिग्री पार, मई-जून में भीषण जल संकट की आशंका
रेवाडी, 20 अप्रैल 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा मुख्यमंत्री से मांग की कि अप्रैल माह में ही गर्मी का पारा 40 डिग्री पार होने के बाद दक्षिणी हरियाणा अहीरवाल क्षेत्र में नागरिकों व पशुओं के लिए पीने का पानी का संकट मुंह बाये खड़ा है। ऐसी स्थिति में इस क्षेत्र में प्राथमिकता से पानी देने के लिए जवाहरलाल नेहरू व महेन्द्रगढ़ कैनाल इंदिरा गांधी नहर में एक माह तक लगातार पानी छोडा जाये।
विद्रोही ने कहा कि अप्रैल माह में 40 डिग्री पारा पहुंच जाना बहुत ही चिंता का विषय है। वर्षो तक इस क्षेत्र में अप्रैल माह में गर्मी 40 डिग्री नही पहुंचा जो इस बार वर्ष 2026 में पहुंच चुका है। भयंकर गर्मी मेें जब अप्रैल माह में है जो सहज अनुमान लगा ले कि मई व जून में गर्मी की स्थिति क्या होगी। अप्रैल माह की गर्मी देखने के बाद सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि मई व जून में गर्मी पारा 50 डिग्री पार हो जायेगा। ऐसी स्थिति में यदि अभी से अहीरवाल क्षेत्र में नागरिकों व पशुओं के लिए पानी का पर्याप्त प्रबंध नही किया तो स्थिति ऐसी होगी कि मनुष्य, पशु-पक्षी सभी पानी के लिए तरसेंगे।
विद्रोही ने कहा कि अहीरवाल क्षेत्र में पहले ही पानी की कमी है। सर्दियों में भी लोगों को पेयजल प्र्याप्त मात्रा में नही मिलता। ऐसे में गर्मी में स्थिति कितनी भयावह होगी, यह बताना भी बेमानी है। यदि सरकार ने समय रहते अहीरवाल क्षेत्र में पेयजल का पर्याप्त प्रबंध नही किया तो स्थिति बद से बदतर होगी। अहीरवाल का लंदन कहलाने वाले रेवाडी शहर की यह हालत है कि सर्दियों में भी पीने का पानी राशनिंग होती है और 15 दिन पानी मिलता है और शेष 15 से 20 दिन पानी की राशनिंग होती है और दो से तीन दिन में एकबार जनस्वास्थ्य विभाग के नलों में पानी आता है। क्योंकि यहां पेयजल आधारित योजना के तहत नहरी पानी एकत्रित करने पर्याप्त मात्रा में वाटर टैंक नही है।
विद्रोही ने कहा कि गांवों के जोहड, तालाब में यदि अभी से पर्याप्त मात्रा में पानी डालकर नही भरा गया तो पशु-पक्षियों के लिए पीने के पानी का संकट खडा होना तय है। ऐसी स्थिति में यह आवश्यक है कि जवाहलाल नेहरू नहर व इंदिरा गांधी नहर को लगातार एक महीने तक चलाकर अहीरवाल के सभी जोहडों, तालाबों व पेयजल परियोजनाओं के वाटर टैंकों को पर्याप्त नहरी पानी से भरा जाये ताकि मई व जून माह में पीने के पानी का संकट का सामना किया जा सके।








