न्यूनतम वेतन में एकमुश्त बढ़ोतरी पर उद्यमियों की चिंता, पुनर्विचार की मांग तेज

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एकमुश्त वेतन वृद्धि को बताया अव्यावहारिक, एमएसएमई पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव

गुरुग्राम, 18 अप्रैल 2026। प्रदेश में न्यूनतम वेतन में एकमुश्त चार हजार रुपये की बढ़ोतरी को लेकर उद्योग जगत में चिंता गहराती जा रही है। इसी मुद्दे पर शुक्रवार को गुरुग्राम के उद्योग विहार में विभिन्न जिलों से आए उद्यमियों ने बैठक कर सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग उठाई।

बैठक में उपस्थित उद्यमियों ने एक स्वर में कहा कि न्यूनतम वेतन में अचानक की गई इतनी बड़ी बढ़ोतरी व्यावहारिक नहीं है और इसका सीधा असर उद्योगों, विशेषकर एमएसएमई सेक्टर पर पड़ेगा। उनका कहना था कि मौजूदा समय में उद्योग पहले ही अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, खासकर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण निर्यात में गिरावट और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में अतिरिक्त वित्तीय बोझ उद्योगों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अगले सप्ताह प्रदेशभर के उद्यमी जिला उपायुक्तों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर इस फैसले को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की मांग करेंगे।

प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (पीएफटीआई) के महानिदेशक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एल. शर्मा ने कहा कि उद्यमियों को वेतन बढ़ोतरी से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसे एकमुश्त लागू करना उद्योगों के लिए भारी पड़ सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि वेतन वृद्धि को किश्तों में लागू किया जाए ताकि उद्योगों पर अचानक आर्थिक दबाव न पड़े।

वहीं, कन्फेडरेशन ऑफ हरियाणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (कॉइन) द्वारा उद्योग विहार स्थित कार्यालय में आयोजित एक अन्य बैठक में भी इसी मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता कॉइन के अध्यक्ष अशोक कोहली ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में पीएफटीआई के चेयरमैन दीपक मैनी मौजूद रहे। इस बैठक में गुरुग्राम-एनसीआर के करीब दो दर्जन औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

दीपक मैनी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य श्रमिकों के हितों की रक्षा करना सराहनीय है, लेकिन उद्योगों की मौजूदा स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि एकमुश्त बढ़ोतरी से विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यदि सरकार चरणबद्ध तरीके से वेतन वृद्धि लागू करती है, तो श्रमिकों और उद्योगों दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि पिछले कुछ समय से उद्योग जगत लगातार आर्थिक दबाव में है और लागत में अचानक वृद्धि से कई इकाइयों के संचालन पर असर पड़ सकता है।

इस दौरान कर्नल राज सिंगला, पी.के. गुप्ता, विनोद गुप्ता, अश्वनी शर्मा, पवन जिंदल, श्रीपाल शर्मा, कंवर सिंह जून, कृष्ण कपूर, प्रवीण यादव, प्रवीण गर्ग, विपिन बजाज, राकेश छाबड़ा और आर.पी. खटाना सहित विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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Author: Bharat Sarathi

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