हरियाणा में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम

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एसीएस स्वास्थ्य डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्यव्यापी समीक्षा कर व्यापक सुधार के निर्देश किए जारी 

स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों पर सख्ती: साप्ताहिक स्टॉक अपडेट, 24×7 लैब सेवाएं, सभी उपमंडलों में जन औषधि केंद्र, लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस

चंडीगढ़, 1 अप्रैल — हरियाणा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने हरियाणा में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी, जवाबदेह और मरीज़ों की उपचार सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कई सुधारों की शुरुआत की है।

सिविल सर्जनों और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए डॉ. मिश्रा ने दवा प्रबंधन, बेहतर जांच सुविधाओं और अस्पतालों के सुचारु संचालन पर केंद्रित एक स्पष्ट कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि यह सिविल सर्जनों की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक सोमवार को दवाओं के स्टॉक का डेटा अपडेट किया जाए और सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बिना किसी रुकावट के सुनिश्चित की जाए।

दवा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने पर सुधार एजेंडा केंद्रित है, जिसके लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए कि सभी जिलों में आवश्यक दवाओं की सूची (EDL) के अनुसार दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सटीक और समयबद्ध डेटा एंट्री की जाए।

उन्होंने असंगत खपत डेटा, वास्तवित स्टॉक और पोर्टल रिकॉर्ड में अंतर तथा डेटा अपडेट में देरी जैसी समस्याओं को रेखांकित किया, जो पूर्वानुमान और खरीद प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए जिलों को नियमित स्टॉक मिलान, सिस्टम वैलिडेशन जांच और मासिक स्टॉक का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, सिविल सर्जनों को समय-समय पर स्टॉक की औचक जांच करने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो। संभावित वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक दवाओं का बफर स्टॉक बनाए रखने और इस संबंध में एसओपी जारी करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

डॉ. मिश्रा ने सिविल सर्जनों को साप्ताहिक मॉनिटरिंग करने और जिला स्तर पर समीक्षा प्रणाली स्थापित करने को कहा है, ताकि हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि समग्र निगरानी और अनुपालन की जिम्मेदारी सिविल सर्जनों की होगी, समय पर डेटा एंट्री और स्टॉक सत्यापन की जिम्मेदारी फार्मासिस्टों की तथा दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग और EDL के अनुपालन की जिम्मेदारी चिकित्सा अधिकारियों की होगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दवाओं की मांग, प्राप्ति और खपत से संबंधित सभी रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट किए जाएं, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग और प्रभावी निर्णय संभव हो सके।

बैठक में जिला अस्पतालों, उपमंडल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त जांच सेवाओं के विस्तार की भी समीक्षा की गई। इस बात की जानकारी दी गई कि जिलों में एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं के संचालन से नागरिकों को किफायती और समय पर जांच सुविधाएं मिल रही हैं।

बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए उन्होंने अस्पतालों के अपडेशन के कार्यों को तेज करने और स्वच्छता एवं हाइजीन प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य संस्थानों में साफ-सफाई बनाए रखने के लिए सिविल सर्जन सीधे तौर पर जवाबदेह होंगे।

समीक्षा बैठक में 100-दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई, जिसमें प्रयासों को तेज करने और समयबद्ध कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही सिविल सर्जनों को लिंगानुपात के रुझानों पर कड़ी निगरानी रखने और हालिया सुधारों को बनाए रखने के निर्देश दिए गए। बैठक में डॉ. मिश्रा को अवगत कराया कि सभी जिलों में पीएनडीटी प्रावधानों के सख्त पालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि सभी निर्देशों के क्रियान्वयन के लिए संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे और निगरानी, डेटा प्रबंधन या सेवा वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं की जाएगा

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Author: Bharat Sarathi

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