लोकसभा में खुलासा—हरियाणा सरकार ने अब तक नहीं भेजा कोई प्रस्ताव; खिलाड़ियों के योगदान के बावजूद प्रदेश को नजरअंदाज करने का आरोप
चंडीगढ़, 10 फरवरी। राष्ट्रमंडल खेल 2030 की मेजबानी अथवा सह-मेजबानी से हरियाणा को बाहर रखे जाने के मुद्दे पर प्रदेश के चार सांसद—जय प्रकाश ‘जेपी’, दीपेन्द्र हुड्डा, वरुण चौधरी और सतपाल ब्रह्मचारी—ने हरियाणा की बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है। सांसदों ने एक स्वर में मांग की कि हरियाणा सरकार तुरंत प्रस्ताव भेजे और भारत सरकार इस विषय पर पुनर्विचार करे, ताकि खेलों में देश का नाम रोशन करने वाले प्रदेश को उसका हक मिल सके।
लोकसभा में सांसद वरुण चौधरी के सवाल के जवाब में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने स्पष्ट किया कि मंत्रालय को हरियाणा की ओर से राष्ट्रमंडल खेल 2030 के लिए मेजबान या सह-मेजबान बनने का कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। इस खुलासे के बाद सांसद चौधरी ने कहा कि प्रदेश के हितों की पैरवी करने में हरियाणा सरकार बार-बार विफल साबित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पानी, साझा राजधानी, अलग उच्च न्यायालय, विधानसभा भवन के लिए स्थान और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों की तरह ही खेलों के मामले में भी राज्य की आवाज बुलंद नहीं की गई।
चारों सांसदों ने इससे पहले संसद परिसर में ‘ओलंपिक व कॉमनवेल्थ खेल हरियाणा में हों’ लिखी तख्तियां लेकर प्रदर्शन भी किया था। उनका कहना है कि राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी से प्रदेश के खेल ढांचे को मजबूती मिलेगी और बड़े बजट का लाभ हरियाणा तक पहुंचेगा।
सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि जिस प्रदेश के खिलाड़ी देश को 50 प्रतिशत से अधिक पदक दिलाते हों, क्या वह राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी का हकदार नहीं? उन्होंने खेल ढांचे की बदहाली पर चिंता जताते हुए कहा कि हालात इतने खराब हैं कि अभ्यास के दौरान खिलाड़ियों की जान तक जा रही है। हुड्डा के अनुसार, यदि हरियाणा को कम से कम को-होस्ट राज्य बनाया जाए तो खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश संभव होगा।
सांसद जय प्रकाश ‘जेपी’ ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश की कुल आबादी में लगभग 2 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला हरियाणा ओलंपिक दल में करीब 21 प्रतिशत योगदान देता है और कुल पदकों में लगभग आधी भागीदारी निभाता है। इसके बावजूद ‘खेलो इंडिया’ में राज्य को न के बराबर बजट मिलना खेल भावना के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए 481 स्टेडियमों के रखरखाव तक के लिए पर्याप्त बजट नहीं दिया गया। ‘पदक लाओ, पद पाओ’ और स्कूल स्तर पर प्रतिभा निखारने वाली SPAT नीति को खत्म कर दिया गया, जिससे खेल नर्सरियां कमजोर पड़ गईं।
सांसद सतपाल ब्रह्मचारी ने भी बजट वितरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि ₹3500 करोड़ के ‘खेलो इंडिया’ बजट में गुजरात को ₹600 करोड़ मिले, जबकि सबसे ज्यादा पदक दिलाने वाले हरियाणा को मात्र ₹80 करोड़ दिए गए। उन्होंने इसे प्रदेश के साथ घोर अन्याय बताते हुए कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 और ओलंपिक 2036 के लिए गुजरात को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि हरियाणा की आवाज तक नहीं उठाई गई।
सांसदों का कहना है कि हरियाणा खेल प्रतिभाओं की धरती है और ऐसे प्रदेश की अनदेखी न केवल खिलाड़ियों के मनोबल को ठेस पहुंचाती है, बल्कि देश की खेल प्रगति के लिए भी नुकसानदेह है। उन्होंने दोहराया कि हरियाणा सरकार तुरंत प्रस्ताव भेजे और केंद्र सरकार इस पर सकारात्मक निर्णय लेकर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन का भागीदार बनाए।







