संसद में विपक्ष की आवाज दबाने और मीडिया पर नियंत्रण के लगाए आरोप, आमजन से लोकतंत्र बचाने की अपील
रेवाडी,10 फरवरी 2026। स्वयंसेवी संस्था ‘ग्रामीण भारत’ के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र मरणासन्न स्थिति में पहुंच चुका है और संघी फासीवाद पूरी तरह लागू हो चुका है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अप्रत्यक्ष पहरा है तथा मीडिया भाजपा-संघ का “दास” बन गया है।
विद्रोही ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर और जीवंत प्रतीक है, लेकिन यदि वहीं नियमों और रूलिंग के बहाने विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जाएगा तो लोकतंत्र के अस्तित्व पर सवाल खड़े होते हैं। उनके अनुसार लोकतांत्रिक परंपराओं के तहत लोकसभा में प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता को राष्ट्र से जुड़े मुद्दे उठाने का विशेष अधिकार है, परंतु लोकसभा अध्यक्ष प्रधानमंत्री को अवसर दे रहे हैं जबकि विपक्ष के नेता को नियमों का हवाला देकर रोका जा रहा है। उन्होंने इस रवैये को घोर अलोकतांत्रिक और संवैधानिक परंपराओं के विपरीत बताया।
वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि संसद में यदि विपक्ष के अधिकारों का हनन कर उसकी आवाज को दबाया जाएगा तो इसे अप्रत्यक्ष तानाशाही और आपातकाल जैसी स्थिति कहा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण हो चुका है और प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विपक्ष की आवाज को या तो बहुत कम स्थान मिलता है या नकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
विद्रोही ने सुप्रीम कोर्ट पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि वह “अंधा, बहरा और गूंगा” बना हुआ है, क्योंकि उसे एक मुख्यमंत्री की कथित हेट स्पीच न तो दिखाई देती है और न सुनाई। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा अध्यक्ष महिला सांसदों पर प्रधानमंत्री के खिलाफ षड्यंत्र रचने का आरोप लगाकर अनैतिकता की सभी सीमाएं पार कर चुके हैं।
उन्होंने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि लोकतंत्र और संविधान को बचाना है तो लोगों को संघी फासीवाद के खिलाफ सड़कों पर संघर्ष करना होगा, अन्यथा लोकतंत्र केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।







