एचपीएससी को बताया ‘हरियाणा सर्विस रिजेक्शन आयोग’,

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प्रथम–द्वितीय श्रेणी भर्तियों में सुनियोजित षड्यंत्र का आरोप — वेदप्रकाश विद्रोही

चंडीगढ़/रेवाडी, 9 फरवरी 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह देश का इकलौता भर्ती आयोग बन चुका है, जो भर्ती करने के बजाय बेरोजगार युवाओं को अयोग्य घोषित करने में लगा है। उन्होंने एचपीएससी को “हरियाणा सर्विस रिजेक्शन आयोग” करार देते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों से आयोग के क्रियाकलाप न केवल असंवैधानिक हैं, बल्कि हरियाणा के युवाओं के भविष्य के साथ सुनियोजित षड्यंत्र किया जा रहा है।

विद्रोही ने आरोप लगाया कि प्रथम व द्वितीय श्रेणी की सरकारी नौकरियों में हरियाणा के योग्य युवाओं को अयोग्य ठहराकर बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है, जबकि संघी पर्ची-खर्ची और मोटे लेन-देन के जरिए हरियाणा से बाहर के युवाओं को नियुक्तियां दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि योग्य उम्मीदवार न मिलने का बहाना बनाकर पिछड़ा वर्ग और दलित वर्ग के संवैधानिक आरक्षण को योजनाबद्ध तरीके से समाप्त किया जा रहा है।

उन्होंने हालिया पीजीटी कंप्यूटर साइंस शिक्षक भर्ती का उदाहरण देते हुए बताया कि 1711 पदों के लिए 5100 अभ्यर्थियों में से मात्र 39 उम्मीदवारों को ही चयनित किया गया, जबकि 1672 पद खाली छोड़ दिए गए। यह कुल पदों का केवल 2.39 प्रतिशत है, जबकि 97.61 प्रतिशत पद रिक्त रखे गए। विद्रोही ने कहा कि जिस आयोग का मूल कार्य युवाओं को रोजगार देना है, वही आयोग हरियाणा के युवाओं को अयोग्य और नकारा साबित कर उनकी बेरोजगारी को क्रूर मजाक बना रहा है।

विद्रोही ने यह भी आरोप लगाया कि बिहार से आयात कर बनाए गए एचपीएससी चेयरमैन आलोक कुमार सार्वजनिक रूप से हरियाणा की उच्च शिक्षण संस्थाओं और युवाओं को अयोग्य बता चुके हैं। यही स्थिति प्रदेश की अन्य प्रथम व द्वितीय श्रेणी की भर्तियों में भी देखने को मिल रही है।

उन्होंने मांग की कि हरियाणा लोक सेवा आयोग के चेयरमैन आलोक कुमार को तत्काल बर्खास्त किया जाए और उनके पूरे कार्यकाल में हुई नियुक्ति प्रक्रियाओं की जांच पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में करवाई जाए। साथ ही एचपीएससी में फैले कथित भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच कर सभी दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

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Author: Bharat Sarathi

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