दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग, किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर खतरे की जताई आशंका
रेवाडी, 4 फरवरी 2026: स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि मोदी-भाजपा-संघ सरकार अमेरिका के साथ कथित “टेऊड डील” के नाम पर देश की जनता से धोखाधड़ी कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस डील के बारे में कोई ठोस जानकारी सार्वजनिक नहीं है, उस पर जश्न मनाना बेशर्मी की पराकाष्ठा है और मीडिया में प्रायोजित खबरें फैलाकर देश के साथ विश्वासघात किया जा रहा है।
विद्रोही ने कहा कि देश के प्रजातांत्रिक इतिहास में यह पहली बार है जब जनता को झूठ बोलकर गुमराह किया जा रहा है और सरकार को इससे कोई झिझक नहीं है। उनके अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, वहां का प्रशासन और व्हाइट हाउस के प्रवक्ताओं के ऑन-कैमरा बयान मोदी-भाजपा सरकार और भारतीय मीडिया द्वारा किए जा रहे दावों से बिल्कुल विपरीत हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अमेरिकी दावे गलत हैं तो प्रधानमंत्री स्वयं सामने आकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करते।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत जैसे सार्वभौमिक और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा पहले अमेरिका की ओर से होना शर्मनाक है और इससे ऐसा प्रतीत होता है मानो भारत अमेरिका के अधीन हो।
विद्रोही ने आशंका जताई कि यदि अमेरिका के दबाव में भारत रूस से तेल खरीदना बंद करता है और कृषि क्षेत्र को जीरो टैरिफ के साथ अमेरिकी उत्पादों के लिए खोल दिया जाता है, तो इससे भारतीय किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है।
उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए जरूरी है कि अमेरिका के साथ हुई कथित टेऊड डील के दस्तावेज सरकार सार्वजनिक करे। विद्रोही ने प्रश्न किया कि आखिर इस डील में ऐसा क्या है जिसे छिपाने के लिए सरकार दस्तावेज सार्वजनिक नहीं कर रही और सूत्रों के नाम पर खबरें परोसकर देश को गुमराह किया जा रहा है।







