वीवीआईपी विमान दुर्घटनाओं पर कब लगेगा अंकुश?

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डॉ0 रमेश ठाकुर

प्लेन क्रैश में जान गंवाने वाले बड़े नेताओं की लिस्ट में अजित पवार का भी नाम जुड़ गया? क्या ये सिलसिला लिस्ट के आखिरी पन्ने तक पहुंचकर ही सांस लेगा, या फिर अंकुश लगाने पर हुकूमती विमर्श किया जाएगा। प्रत्येक घटनाओं पर जांच के नाम पर कागजी कार्यवाही को देशवासी दशकों से देखते आए हैं। सरकारें भी जानती हैं कि कोई भी जांच आजतक किसी नतीजे तक नहीं पहुंची? 7 माह पहले जब अहमदाबाद में विमान दुर्घटना घटी, तब केंद्र सरकार से लेकर एविएशन इंडस्ट्री ने भी उड्डयन क्षेत्र को सुरक्षित बनाने का संकल्प लिया था। पर, अफसोस वह संकल्प पूरा नहीं हुआ। 28 जनवरी 2026 को सुबह एक और प्लेन हादसा हो गया। क्या इस दुखद हादसे की हुकूमती स्तर पर कोई जिम्मेदार व्यक्ति जिम्मेदारी लेगा? शायद नहीं? मीडिया में जब तक घटना का शोर मचेगा, तभी तक जांच के नाम पर दिखावटी एक्शन दिखेगा। मामला जैसे ही शांत होगा, ठीक अहमदाबाद विमान घटना की तरह सब कुछ ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा और लोग भी हादसे को भूल जाएंगे।महाराष्ट्र सियासत के कद्दावर और एनसीपी अध्यक्ष ;अजित गुटद्ध अजित पवार को भी इस हवाई सफर ने लील लिया। दिवंगत पवार की मौत ने न सिर्फ एविएशन इंडस्ट्री की लापरवाह कार्यशैली पर फिर से सवाल उठाए हैं, बल्कि कुछ ऐसे सवालों को भी जन्म दिया है जिनके न सुलझने की संभावनाएं साफ-साफ दिखती हैं। घटना हादसा है या साजिश? इसको लेकर बहस भी राजनीतिक स्तर पर छिड़ी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकाखरगे तक संदेह जताकर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। क्योंकि विमान हादसों में दिग्गज नेताओं की जान गंवाने की लंबी कतार है। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, सीडीएस जनरल बिपिन रावत, दोरजी खांडू, वाईएसआर रेड्डी, माधवराव सिंधिया के अलावा 80 के दशक में संजय गांधी और उससे पहले होमी जहांगीर भाभा, बलवंत राय मेहता और सुभाष चंद्र बोस की मौत आज भी सरकारी फासलों में अनसुलझी पहेली बनी हुई है।

बहरहाल, बारामती प्लेन क्रैश के दुर्घटनास्थल से विमान के अवशेषों का ठीक से विश्लेषण होने के अलावा प्लेन के ब्लैक बॉक्स की तलाश कर उसके वॉइस सैंपल से प्रत्येक बिंदु का खुलासा किया जाए। पूर्ववर्ती में विमान घटनाओं का दर्द आज तक लोगों के जेहन से नहीं निकला। थोड़ा कम होता है और दूसरी घटना घट जाती है। हाई प्रोफ़ाइल घटनाओं को कई दृष्टिकोण से देखा जाता है। बारामती दुर्घटना की जांच का आदेश फिलहाल सरकार ने दिया है। शुरुआती जांच डीजीसीए और एएआईबी को सौंपी है। जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर उठना भी स्वाभाविक है। क्योंकि बारामती में हुए लियरजेट-45 हादसे को जांच एजेंसियां तकनीकी खराबी और घने कोहरे को मान रही हैं। जबकि, विमानन अधिकारी थोड़ा इंतज़ार कर जांच के अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने की बात कह रहे हैं। पायलट ने आपातकालीन लैंडिंग की कोशिश की थी, पर पैंतरेबाजी के दौरान विमान ने नियंत्रण खो दिया। फ्लाइट रडार-24 के आंकड़ों के मुताबिक, विमान एक बार ‘गो-अराउंड’ कर चुका था और दूसरी बार उतरने के प्रयास में दुर्घटनाग्रस्त हुआ।

प्लेन हादसों का सिलसिला आखिर कब तक चलता रहेगा। देखा जाए, तो साल 2024-25 एविएशन इंडस्टृ के लिए किसी बड़े सदमें से कम नहीं रहा। 2025 का गुजरता साल और 2026 की शुरूआती हवाई सफर के लिए अशुभ जैसी रही। ऐसा जख्म दिया, जो शायद कभी भर न पाए। 2024 में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में 6 बड़े विमान हादसे हुए, जिनमें 234 यात्रियों की मौतें और 56 लोग घायल हुए। 2025 में भी अनगिनत हादसे हुए देश-विदेश में। इसलिए कह सकते हैं कि विमान हादसों के लिहाज आने वाला प्रत्येक वर्ष मनहूस हो रहा है। ईरान, नेपाल, कनाड़ा और दक्षिण कोरिया के विमान हादसों ने रोंगटे खड़े किए थे। उन हादसों ने दुनिया को गहरे घाव दिए। खैर, जो बीता, उसे कुदरत का फरमान समझकर कड़वी यादें मानकर भुला देना चाहिए। पर, नए वर्ष-2026 में न सिर्फ भारत, बल्कि समूचे संसार के उड्डयन यंत्र और हुकूमतों को सुरक्षित हवाई यात्राओं के प्रति सामूहिक रूप से संकल्पित होना चाहिए। क्योंकि हवाई हादसे अब रेल दुर्घटना जैसे हो गए हैं? लगातार बढ़ते विमान दुर्धाटनाओं ने हवाई यात्रा करने वाले लोगों के मन-मष्तिष्क में गहरा डर बिठा दिया है।

एविएशन तंत्र का प्रत्येक घटनाओं का कारण मौसम की खराबी या टेक ऑफ-टेक ऑफ बताना, अटपटा सा लगता है। बात गले तक नहीं उतरती? क्योंकि विमान हादसों में सबसे अव्वल मानवीय हिमाकतें सामने आती हैं जिन्हें एविएशन तंत्र इसलिए सार्वजनिक नहीं करता, क्योंकि उससे उनके पूरे तंत्र को एक्सपोज होने का डर सताने लगता है। हादसों पर उड्यन सिस्टम कभी अपनी गलती नहीं मानता। प्रत्येक हादसों में बच निकलने का जुगाड़ खोजता है। प्लेनों का टायर फटना, रन-वे पर उनका फिसला, एटीएस की लापरवाही से विमानों का आपस में टकराना, उड़ान के दौरान इंजनों का खराब होना इत्यादि ये ऐसी घटनाएं हैं, जो अब आम हो चुकी हैं। इसी कारण उड्डयन तंत्र की विश्वसनियता अब यात्रियों को संदिग्ध लगने लगी है।

अधिकांश विमान र्दुघटनाओं के बाद ‘ब्लैक बॉक्स’ में दर्ज सच्चाई को उड्यन विभाग कभी उजागर नहीं करता, अगर कर दे तो पूरी की पूरी सच्चाई सामने आ जाए। ‘ब्लैक बॉक्स’ ऐसा यंत्र है जो हाइट, स्पीड, डायरेक्शन, फ़्यूल लेवल, इंजन परफ़ॉर्मेंस रिकॉर्ड करता है। कॉकपिट में मौजूद पायलट, को-पायलट और क्रू मेंबर के बीच हुई बातचीत का डाटा एकत्र करता है। उसमें कॉकपिट में मौजूद सभी आवाज़ें और ध्वनि चेतावनियां शामिल होती हैं। ब्लैक बॉक्स टाइटेनियम से निर्मित होता है, जो 30 दिनों तक बिना बिजली के काम करने के अलावा 11,000 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान झेलने में सक्षम होता है। उड्डयन सिस्टम को रिफॉर्म करने की दरकार है। विमानन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अनुसंधान, हवाई यात्रियों, कर्मियों, और आम जनता को प्रशिक्षित भी करना होगा। साथ ही विमान और विमानन बुनियादी ढांचे के डिज़ाइन में बदलाव की दरकार भी महसूस होने लगी है। एविएशन तंत्र को भरोसा दिलाना होगा कि हवाई सफर की अजित पवार के रूप में हाईप्रोफाइल ये घटना अंतिम है?

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Author: Bharat Sarathi

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