सम्पूर्ण समाज की एकता से ही विकसित राष्ट्र होगा भारत-डॉ सुरेंद्र पाल

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आरएसएस शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में आयोजित की गई गोष्ठी।

गुरुग्राम :- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक डॉ सुरेंद्र पाल का कहना है कि पंच परिवर्तन से ही विकसित भारत की संकल्पना को साकार किया जा सकता है। सामाजिक समरसता, पर्यावरण, स्व का बोध, नागरिक कर्तव्य, व कुटुम्ब प्रबोधन हिंदुत्व जीवन शैली का मूलाधार रहा है। इसी के आधार पर ही भारत को पुनः विश्व गुरु के आसन तक ले जाया सकता है। श्री सुरेंद्र पाल आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में गुरुग्राम विश्वविद्यालय में आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। भारतीय ज्ञान एवं भाषा फेकल्टी व आरएसएस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रमुख जन गोष्ठी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति संजय कौशिक ने की व मुख्य अतिथि आई आई एल एम यूनीवर्सिटी की पूर्व कुलपति सुजाता साही थी।

डॉ. सुरेंद्रपाल जी ने अपने संबोधन में कहा कि पंच परिवर्तन केवल संघ का नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज का विषय है। यह केवल विचार या भाषण तक सीमित न रहकर जीवन में व्यवहार के रूप में उतरना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से करना आवश्यक है।

सामाजिक समरसता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि समरसता की भावना बचपन से विकसित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “गंगा केवल जल नहीं, माँ है।” उन्होंने पानी बचाओ, पेड़ लगाओ और प्लास्टिक हटाओ का संदेश दिया। महाकुंभ को कचरा मुक्त आयोजन बताते हुए एक थैला–एक थाली अभियान को अनुकरणीय बताया।

नागरिक कर्तव्य बोध पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने यातायात नियमों का पालन, स्वच्छता, अनुशासन, धैर्य एवं पंक्ति में लगने जैसे संस्कारों को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि मन का अनुशासन ही सशक्त समाज की नींव है।

कुटुंब प्रबोधन विषय पर उन्होंने संयुक्त परिवार व्यवस्था को बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक बताया। मोबाइल से दूरी बनाकर परिवार में मंगल संवाद प्रारंभ करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि “मिलकर संवाद करना ही सच्चा परिवार है।” उन्होंने आरएसएस की कार्यशैली पर चर्चा करते हुए कहा कि आरएसएस समाज में संगठन नही बल्कि समाज का संगठन करने लिए है। उन्होंने उपस्तिथ प्रमुख जनों का आह्वान करते हुए कहा कि सम्पूर्ण समाज को एकनिष्ठ होकर कार्य करने से ही विकसित भारत की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सुजाता शाही जी ने कहा कि समाज से नकारात्मकता को हटाकर कर्तव्यबोध को व्यवहार में लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कोई भी राष्ट्र केवल GDP से विकसित नहीं होता, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक स्थिरता से सशक्त बनता है।छठ पूजा को सामाजिक एकता का श्रेष्ठ उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि यह पर्व बिना किसी भेदभाव के समाज को जोड़ता है।

स्वदेशी जीवनशैली पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि स्वदेशी केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि हस्ताक्षर, वेश-भूषा, भाषा, भोजन, भवन, भ्रमण एवं सामाजिक आचरण में भी स्वदेशी भाव होना चाहिए। उन्होंने “Proud to be Swa” का संदेश देते हुए स्वदेशी अपनाने का आह्वान किया।

पर्यावरण संरक्षण को पंचतत्वों की पूजा बताया।

गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे कुलगुरु प्रो. संजय कौशिक ने कहा कि पंच परिवर्तन को केवल सुनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे दैनिक जीवन में अपनाना आवश्यक है। उन्होंने शाखा को ऐसा मंच बताया जहाँ कम समय में जीवन के आवश्यक संस्कार विकसित होते है।

कार्यक्रम में सज्जन शक्ति के जागरण एवं समाज में सकारात्मक वातावरण निर्माण पर विशेष बल दिया गया। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन महानगर संघचालक जगदीश ग्रोवर जी द्वारा किया गया। मंच संचालन प्रो. डॉ. राकेश योगी ने किया।

गोष्ठी के संयोजक हरीश जी, पालक सत्यमनु जी सहित बड़ी संख्या में नागरिक, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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Author: Bharat Sarathi

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