मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-सह-सचिव राकेश कादियान ने हरी झंडी दिखाकर कार्यक्रम की शुरुआत की
गांवों व शहरों में बाल विवाह निषेध कानून, अधिकारों और निःशुल्क विधिक सहायता की दी जाएगी जानकारी

गुरुग्राम, 30 जनवरी- जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे जनजागरूकता प्रयासों के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), गुरुग्राम द्वारा ‘बाल विवाह मुक्त रथ’ के माध्यम से विशेष विधिक जागरूकता अभियान संचालित किया गया। इस क्रम में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-सह-सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गुरुग्राम राकेश कादियान ने रथ को हरी झंडी दिखाकर विभिन्न ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के लिए रवाना किया, ताकि आमजन तक बाल विवाह संबंधी कानूनी जानकारी प्रभावी रूप से पहुंचाई जा सके।
उन्होंने कहा कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है, जिससे उनका शारीरिक, मानसिक एवं शैक्षणिक विकास प्रभावित होता है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह कराना, उसमें सहयोग देना या उसे बढ़ावा देना दंडनीय अपराध है, जिसके लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए केवल प्रशासनिक प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी और सतर्कता भी आवश्यक है। समय पर सूचना और जागरूकता से ही इस कुप्रथा को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।
‘बाल विवाह मुक्त रथ’ जिले के गांवों, कॉलोनियों, स्कूलों एवं सार्वजनिक स्थानों पर जाकर ऑडियो-वीडियो संदेशों, पंपलेट वितरण तथा सीधे संवाद के माध्यम से लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों, कानूनी अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता सेवाओं तथा उपलब्ध हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी देगा। साथ ही पैरालीगल वॉलंटियर्स और पैनल अधिवक्ता लोगों की समस्याएं सुनकर उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान करेंगे।
आमजन से अपील की गई कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले या ऐसी आशंका हो तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, संबंधित प्रशासन अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क करें, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।
इस अवसर पर विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी, पैनल अधिवक्ता, पैरालीगल वॉलंटियर्स तथा विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण हेतु मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।







