‘वीबीजी रामजी’ कानून महज जुमला, रोजगार की कोई गारंटी नहीं
चंडीगढ़/रेवाडी | 24 जनवरी 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर मनरेगा कानून को खत्म कर ग्रामीण मजदूरों से खुला धोखा करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार वीबीजी रामजी जैसे नए-नए नाम गढ़कर मजदूरों को गुमराह कर रही है और रोजगार की संवैधानिक गारंटी खत्म कर “हवा-हवाई” वादों से जनता को ठगने में लगी है।
विद्रोही ने कहा कि भाजपा मंत्री, सांसद और विधायक मनरेगा को खत्म कर नए कानून का महिमामंडन कर रहे हैं, लेकिन वे एक भी ठोस तथ्य बताने को तैयार नहीं हैं। “ग्रामीण मजदूरों की आय बढ़ेगी”—यह महज एक राजनीतिक जुमला है। सवाल यह है कि आय किसकी बढ़ेगी, कितनों की बढ़ेगी और कैसे बढ़ेगी? इस पर भाजपा पूरी तरह मौन है।
उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार में नैतिक साहस है तो वह वीबीजी रामजी कानून की वह धारा सार्वजनिक करे, जिसमें मनरेगा की तरह रोजगार की संवैधानिक गारंटी दी गई हो। विद्रोही ने तीखा सवाल किया कि जब नए कानून में रोजगार की कोई गारंटी ही नहीं है, तो फिर 100 दिन या 125 दिन काम देने की घोषणाएं किस आधार पर की जा रही हैं? क्या यह सिर्फ चुनावी जुमले नहीं हैं?
वेदप्रकाश विद्रोही ने भाजपा के 11 साल के शासन पर करारा हमला करते हुए कहा कि जब मनरेगा में 100 दिन रोजगार की गारंटी होने के बावजूद भाजपा सरकार हरियाणा में मजदूरों को औसतन केवल 22–23 दिन का काम ही दे सकी, तो बिना गारंटी वाले कानून के तहत 125 दिन रोजगार देने की बात जनता को मूर्ख बनाने के अलावा और क्या है? उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि क्या यह काम चांद पर मिलेगा या केवल पोस्टरों और भाषणों में ही मिलेगा?
उन्होंने कहा कि मनरेगा कानून ने ग्राम पंचायतों को अधिकार दिए थे कि गांव में कौन-सा काम होगा और किस जगह रोजगार दिया जाएगा, लेकिन नया कानून इन अधिकारों को छीनकर सब कुछ केंद्र सरकार के हवाले कर रहा है। जब पंचायतों को ही काम करवाने का अधिकार नहीं रहेगा, तो गांव का मजदूर काम मांगने कहां जाएगा—दिल्ली दरबार?
विद्रोही ने यह भी सवाल उठाया कि पिछले पांच वर्षों में जिन मजदूरों को मनरेगा के तहत 100 दिन काम मांगने के बावजूद रोजगार नहीं मिला, उन्हें रोजगार भत्ता क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि यह भाजपा सरकार की मजदूर-विरोधी मानसिकता को उजागर करता है, जो कानून तोड़कर भी जवाबदेही से बचती रही है।
अंत में वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि भाजपा सरकार झूठ, भ्रम और जुमलों के सहारे मनरेगा खत्म कर रही है और ग्रामीण मजदूरों से उनके संवैधानिक अधिकार छीन रही है। सरकार सवालों से भागने के बजाय जनता को यह बताए कि रोजगार की गारंटी कहां है और मजदूरों को उनका हक कब मिलेगा?







