समुद्र विज्ञान की विशेषज्ञ, साहित्य और पर्यावरण की सजग प्रहरी थीं डॉ. स्वराज कुमारी
वानप्रस्थ परिवार के साथियों के सान्निध्य में जीवन की अंतिम यात्रा पूरी की

हिसार | 14 जनवरी – समुद्र विज्ञान की विशेषज्ञ, प्रखर वक्ता, साहित्य प्रेमी एवं हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर डॉ. स्वराज कुमारी का मंगलवार रात हिसार में लगभग 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं।
डॉ. स्वराज कुमारी आजीवन अविवाहित रहीं। जीवन के कष्टपूर्ण अंतिम दिनों में वरिष्ठ नागरिकों की संस्था वानप्रस्थ से जुड़े उनके साथियों ने पूरे समर्पण भाव से उनकी देखभाल की। उनका अंतिम संस्कार बुधवार दोपहर सेक्टर-16 स्थित श्मशान घाट में किया गया, जहाँ वानप्रस्थ के सदस्यों, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यापकों व कर्मचारियों सहित बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
डॉ. स्वराज कुमारी का जन्म वर्ष 1946 में तत्कालीन पश्चिमी पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे। देश में स्वराज की चर्चा के दौर में जन्मी पुत्री का नाम उन्होंने स्वराज कुमारी रखा। देश विभाजन के बाद उनका परिवार नंगल आकर बस गया। प्रारंभिक शिक्षा नंगल में प्राप्त करने के बाद उन्होंने लुधियाना से उच्च शिक्षा हासिल की।

उच्च शिक्षा पूर्ण करने के उपरांत वे हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में सहायक प्रोफेसर नियुक्त हुईं और वर्ष 2006 में प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हुईं। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे हिसार में ही रहीं और सामाजिक, बौद्धिक तथा पर्यावरणीय गतिविधियों में सक्रिय बनी रहीं।
डॉ. स्वराज कुमारी प्लांट फिजियोलॉजी की प्रोफेसर थीं, परंतु विज्ञान के विभिन्न विषयों, विशेषकर समुद्र विज्ञान, पर उनका गहरा अध्ययन था। वानप्रस्थ के मंच से उन्होंने अनेक ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिए। अपने एक वक्तव्य में उन्होंने बताया था कि पृथ्वी पर उपलब्ध प्राणवायु ऑक्सीजन का बड़ा हिस्सा समुद्रों से प्राप्त होता है। वे यह भी मानती थीं कि समुद्री घास भविष्य में मानव भोजन के लिए प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकती है।
समुद्रों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर वे गंभीर रूप से चिंतित रहती थीं और इसे समुद्री जीवों व मानव जीवन—विशेषकर मछली पर निर्भर आबादी—के लिए बड़ा खतरा मानती थीं।
डॉ. स्वराज कुमारी हिसार की स्वयंसेवी संस्था राइट टू क्लीन एयर की सक्रिय सदस्य भी थीं। उन्हें पौधों से विशेष लगाव था और उनके घर के आँगन में सौ से अधिक पौधे मौजूद थे।
साहित्य के प्रति उनका प्रेम भी उल्लेखनीय था। उन्होंने सुनीता मेहतानी के साथ मिलकर हिसार बुक क्लब की स्थापना की, जो नियमित रूप से मासिक साहित्यिक गोष्ठियों का आयोजन करता आ रहा है। वानप्रस्थ की बैठकों में वे हर अवसर के लिए उपयुक्त शेर सुनाने के लिए जानी जाती थीं। प्रसिद्ध शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ उनके प्रिय कवियों में शामिल थे।
डॉ. स्वराज कुमारी के निधन पर उनके साथियों, मित्रों और विद्यार्थियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सीनियर सिटीजन क्लब वानप्रस्थ द्वारा शुक्रवार, 16 जनवरी को विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा।







