हरियाणा की नौकरियों पर ‘बाहरीकरण’ का आरोप, भाजपा पर सुरजेवाला का तीखा हमला

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सरकारी भर्तियों में हरियाणवी युवाओं के साथ सुनियोजित भेदभाव, ‘चपरासी हमारे–अफसर बाहर के’ मॉडल लागू

चंडीगढ़/गुरुग्राम, 26 दिसंबर 2025। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा की भाजपा सरकार पर सरकारी नौकरियों में प्रदेश के युवाओं के हक पर “डाका” डालने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता में आते ही भाजपा ने हरियाणा की नौकरियां सुनियोजित तरीके से बाहरी उम्मीदवारों में बांटनी शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि हरियाणा के मेधावी युवक-युवतियां बेरोजगारी के कुएं में धकेले जा रहे हैं, जबकि बाहरियों को यहां अफसर बनाकर बैठाया जा रहा है।

सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा सरकार की एक सोची-समझी रणनीति के तहत अफसरों के 70 से 80 प्रतिशत पदों पर हरियाणा से बाहर के उम्मीदवारों की भर्ती की जा रही है। उन्होंने हरियाणा पावर यूटिलिटीज़ में असिस्टेंट इंजीनियर की भर्ती का उदाहरण देते हुए बताया कि सामान्य वर्ग के 214 पदों में से 185 पदों पर बाहरी उम्मीदवारों का चयन किया गया, यानी करीब 90 प्रतिशत अफसर बाहर के और हरियाणा के सामान्य वर्ग के युवाओं के हिस्से में मात्र 10 प्रतिशत पद आए।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज हरियाणा के हर नौजवान की जुबान पर नायब सैनी सरकार का एक ही फॉर्मूला है— “चपरासी हमारे, और अफसर हरियाणा से बाहर के।”

सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा 11 वर्षों से “ना पर्ची, ना खर्ची” का नारा देकर हरियाणा के युवाओं को गुमराह कर रही है। मनोहर लाल खट्टर के शासनकाल से लेकर नायब सैनी की सरकार तक युवाओं को बेरुखी, बेबसी और बेवफाई के सिवा कुछ नहीं मिला। हर भर्ती में बाहरियों को नौकरी मिल जाती है और हरियाणा के युवा ठगे से खड़े रह जाते हैं।

उन्होंने कहा कि हालत यह है कि प्रदेश के पढ़े-लिखे, मेधावी बच्चे विदेशों में मजदूरी करने को मजबूर हैं और बाहरी राज्यों से आए युवाओं को हरियाणा में शासन-प्रशासन सौंपा जा रहा है। यह हरियाणवियों को अपने ही राज्य में “दूसरे दर्जे का नागरिक” बनाने की बड़ी साजिश है।

भर्तियों के आंकड़ों से भाजपा सरकार को घेरा
सुरजेवाला ने कहा कि HPSC और HSSC के जरिए की जा रही लगभग हर बड़ी भर्ती में यही पैटर्न अपनाया जा रहा है—

  • हाल ही में सिंचाई विभाग में सहायक अभियंता (सिविल) की भर्ती में सामान्य वर्ग के 49 पदों में से 28 पर बाहरी उम्मीदवार चुने गए।
  • 10 साल बाद हुई एएमओ भर्ती में सामान्य वर्ग के 427 पदों में से जारी 394 पदों की सूची में लगभग 75 प्रतिशत चयन बाहरी उम्मीदवारों का रहा।
  • सिविल जज भर्ती में 110 में से 60 पद बाहरी उम्मीदवारों को दिए गए।
  • तकनीकी शिक्षा विभाग में प्राध्यापकों के सामान्य वर्ग के 153 में से 106 पद बाहरियों को मिले।
  • HCS की हर भर्ती में 40 प्रतिशत से अधिक बाहरी उम्मीदवारों का चयन किया गया।
  • वर्ष 2019 में बिजली विभाग में SDO भर्ती के 80 पदों में से मात्र 2 उम्मीदवार हरियाणा के थे, जिसे विरोध के बाद रद्द करना पड़ा।
  • 2019 में असिस्टेंट प्रोफेसर (पॉलिटिकल साइंस) की भर्ती में 18 में से 11 उम्मीदवार बाहरी और सिर्फ 7 हरियाणवी थे।
  • एग्रीकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर की भर्ती में सामान्य वर्ग के 23 पदों में 16 बाहरी और केवल 7 हरियाणवी चयनित हुए।

सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि हरियाणा देश का अकेला ऐसा राज्य है, जहां जनरल नॉलेज के पेपर में हरियाणा की संस्कृति, भाषा, सामाजिक ताना-बाना, भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय विरासत से जुड़े सवाल पूछने की कोई अनिवार्यता नहीं है। भाजपा सरकार के अनुसार हरियाणा में पले-बढ़े होने और यहां के समाज को समझने की कोई जरूरत नहीं।

उन्होंने कहा कि यह केवल सामान्य वर्ग तक सीमित साजिश नहीं है। आरक्षित वर्गों के युवाओं को भी योजनाबद्ध तरीके से नुकसान पहुंचाया जा रहा है। HPSC की कई भर्तियों में आरक्षित वर्गों के हरियाणवी युवाओं को सब्जेक्टिव पेपर में जानबूझकर फेल किया जा रहा है, ताकि सामान्य वर्ग की सीटों पर भी बाहरी उम्मीदवारों को बैठाया जा सके।

सुरजेवाला ने कहा कि जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए सरकार हर दो-चार साल में ग्रुप-डी की भर्ती निकालकर हजार-दो हजार चपरासी-चौकीदार जैसे पदों पर हरियाणवी युवाओं को लगाकर “बिना पर्ची, बिना खर्ची” का ढोंग रचती है, जबकि सभी महत्वपूर्ण पद बाहरियों के हवाले कर दिए जाते हैं।

डोमिसाइल नियमों पर भी सवाल
उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार ने हरियाणा के निवास प्रमाण पत्र की समय-सीमा 10 साल से घटाकर 5 साल कर दी, जिससे एनसीआर क्षेत्र में बाहर से आए लोग आसानी से डोमिसाइल बनवाकर उन आरक्षित पदों पर भी दावा कर रहे हैं, जो पहले हरियाणा के दलित और पिछड़े वर्गों के लिए सुरक्षित थे। यह हरियाणवियों को अपने ही राज्य में अल्पसंख्यक बनाने की साजिश है।

मांगें
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मांग की कि हरियाणा पावर यूटिलिटीज़ की असिस्टेंट इंजीनियर भर्ती को तत्काल रद्द किया जाए। साथ ही भर्ती प्रक्रिया को हरियाणा की संस्कृति, सामाजिक-भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बनाया जाए, ताकि भाषा-बोली और स्थानीय हालात समझने वाले युवाओं को न्यायसंगत प्राथमिकता मिल सके। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सैनी से हरियाणा के युवाओं से माफी मांगने और उनके साथ हो रहे भेदभाव को खत्म करने के लिए एक सार्वजनिक और ठोस रोडमैप पेश करने की भी मांग की।

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Author: Bharat Sarathi

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