प्रदूषण: हमारी नस्ल को ख़तरे का मौन षड्यंत्र
पुरुषत्व को लीलता ज़हरीला धुआँ
मातृत्व को चुनौती देती जहरीली हवा
डॉ. विजय गर्ग, सेवानिवृत्त प्रिंसिपल
आज के दौर में जब दुनिया तीव्र औद्योगीकरण और शहरीकरण की ओर बढ़ रही है, प्रदूषण एक ऐसा ख़ामोश संकट बन चुका है जो न केवल पृथ्वी के पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ रहा है, बल्कि सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य को भी खतरे में डाल रहा है। विशेष रूप से वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर हमारी प्रजनन क्षमता और श्वसन तंत्र पर गहरा और विनाशकारी असर डाल रहा है।
प्रजनन क्षमता पर प्रदूषण का घातक वार
वायु में मौजूद महीन कण (PM 2.5, PM10), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂), सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और भारी धातुएँ पुरुषों और महिलाओं—दोनों की प्रजनन क्षमता को कम करने वाले प्रमुख कारक बन चुके हैं।
पुरुषों पर प्रभाव
- शुक्राणु गुणवत्ता में कमी : प्रदूषक तत्व शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता और आकार—तीनों पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
- ऑक्सीडेटिव तनाव में वृद्धि : शरीर में मुक्त कण बढ़ने से शुक्राणु के डीएनए को क्षति पहुँचती है, जिससे गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है।
- हार्मोनल असंतुलन : प्रदूषण टेस्टोस्टेरोन जैसे आवश्यक प्रजनन हार्मोन के स्तर को प्रभावित करता है।
महिलाओं पर प्रभाव
- अंडाशय की कार्यक्षमता पर असर : विशेष रूप से PM 2.5 के लंबे संपर्क से एंटी-मुलेरियन हार्मोन (AMH) का स्तर कम हो सकता है, जिससे ओवेरियन रिज़र्व घटता है।
- मासिक चक्र में अनियमितता : हार्मोनल व्यवधान के कारण ओव्यूलेशन में देरी तथा चक्र में गड़बड़ी हो सकती है।
- गर्भधारण में जटिलताएँ : समय से पहले प्रसव, गर्भपात और भ्रूण विकास प्रभावित होने का जोखिम बढ़ जाता है।
प्रदूषण का तात्कालिक वार: साँसें भी कठिन
वायु प्रदूषण का सबसे तेज और प्रत्यक्ष प्रभाव हमारी श्वसन प्रणाली झेलती है। प्रदूषक तत्व फेफड़ों के गहरे हिस्सों तक पहुँचकर गंभीर हानियाँ पहुँचाते हैं।
- अस्थमा, COPD, ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों का ख़तरा बढ़ता है।
- फेफड़ों की कार्यक्षमता घटती है, जिससे कम प्रयास में भी थकान और सांस फूलने की समस्या होती है।
- प्रदूषक रक्त में मिलकर हृदय और मस्तिष्क तक पहुँचते हैं, जिससे दिल का दौरा और स्ट्रोक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
बचाव और समाधान: छोटे कदम, बड़ा असर
प्रदूषण को पूरी तरह खत्म करना हमारे नियंत्रण में नहीं, पर उसके प्रभाव कम ज़रूर किए जा सकते हैं—
- खराब AQI के दिनों में N95/N99 मास्क का उपयोग
- घर में एयर प्यूरीफायर और वेंटिलेशन पर ध्यान
- एंटीऑक्सीडेंट युक्त भोजन—विटामिन C, E, ओमेगा-3 फैटी एसिड
- भारी ट्रैफ़िक व औद्योगिक इलाकों में लंबा समय बिताने से बचें
- नियमित रूप से प्रजनन और फेफड़ों के स्वास्थ्य की जाँच करवाएँ
निष्कर्ष
प्रदूषण एक अदृश्य महामारी है—धीरे-धीरे हमारी सांसों, हमारी अगली पीढ़ी और इंसानी अस्तित्व को चुनौती देने वाली महामारी। इससे निपटने के लिए सरकारी नीतियों, औद्योगिक सुधारों और व्यक्तिगत जागरूकता—तीनों की साझी जिम्मेदारी है।
स्वस्थ भविष्य, सुरक्षित प्रजनन क्षमता और स्वच्छ साँसों के लिए— हमें स्वच्छ हवा को अधिकार नहीं, आवश्यकता मानकर तत्काल और सामूहिक प्रयास करने होंगे।







