वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक

पंचकूला, 1 अप्रैल – हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (HIPA) के पंचकूला स्थित डिविजनल प्रशिक्षण केंद्र में मंगलवार से हरियाणा विधान सभा के प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के लिए दो दिवसीय प्रशासनिक प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण की पहल पर आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहले दिन चार सत्र आयोजित किए गए।
प्रशिक्षण का शुभारंभ:
कार्यक्रम की शुरुआत में विधान सभा के सचिव डॉ. सतीश कुमार ने उद्घाटन वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रशिक्षण के महत्व और अधिकारियों की जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला।
प्रथम सत्र:
संस्थान के पूर्व प्राचार्य राम शरण ने “कार्यालय प्रक्रियाओं के मैनुअल” पर चर्चा की। उन्होंने शाखा अधिकारियों और प्रभारियों की भूमिकाओं एवं दायित्वों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। यह सत्र प्रशासनिक प्रक्रिया और कार्यालय प्रबंधन के महत्व को रेखांकित करता है।
द्वितीय सत्र:
संस्थान के फैकल्टी मेंबर पवन शर्मा ने “नोटिंग और ड्राफ्टिंग की अनिवार्यता” पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में संचार कौशल की अहमियत बताई और नोटिंग-ड्राफ्टिंग के माध्यम से तथ्यों की सटीक प्रस्तुति पर जोर दिया।
तृतीय एवं चतुर्थ सत्र:

हरियाणा सरकार की पूर्व मुख्य सचिव एवं हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण की चेयरपर्सन केशनी आनंद अरोड़ा ने “नेतृत्व और टीम निर्माण” पर व्याख्यान दिया। उन्होंने अधिकारियों को नेतृत्व कौशल विकसित करने के साथ-साथ प्रशासन में नैतिकता का महत्व समझाया।
चौथे सत्र में हरियाणा सिविल सेवा (सरकारी कर्मचारी आचरण) नियम 2016 पर चर्चा हुई। इस सत्र में कर्मचारियों के करणीय और अकरणीय कर्तव्यों की गहन व्याख्या की गई।
प्रशिक्षण का उद्देश्य:
यह प्रशिक्षण हरियाणा विधान सभा के अधिकारियों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं, नेतृत्व क्षमता, नोटिंग-ड्राफ्टिंग और नैतिक प्रशासनिक मूल्यों के प्रति सजग बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
प्रशिक्षण की समय-सारिणी:
- 2 अप्रैल: प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों का प्रशिक्षण
- 2 से 4 अप्रैल: विधान सभा के रिपोर्टर और पर्सनल स्टाफ की ट्रेनिंग
- 3 से 5 अप्रैल: मिसलेनियस स्टाफ का प्रशिक्षण
- 5 से 8 अप्रैल: सहायकों का प्रशिक्षण
- 7 से 9 अप्रैल: र्क्लकों का प्रशिक्षण
प्रशिक्षण का महत्व:
इस कार्यक्रम के माध्यम से अधिकारियों को न केवल प्रशासनिक कार्यकुशलता में सुधार का अवसर मिलेगा, बल्कि उन्हें अपनी भूमिका के प्रति अधिक सजग और निपुण बनने में भी सहायता मिलेगी। इस प्रकार के प्रशिक्षण से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।
यह प्रशिक्षण पहल न केवल अधिकारियों को कुशल बनाने का प्रयास है, बल्कि शासन प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।