25 वें सूफी संगीत महोत्सव जहान-ए-खुसरो 28 फरवरी से 2 मार्च 2025 का आगाज़ ……..

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

हमारा हिंदुस्तान जन्नत का वो बगीचा है, जहां तहज़ीब का हर रंग फला-फूला है

जहान-ए-खुसरो सूफी संगीत महोत्सव एक सांस्कृतिक आंदोलन बन चुका है,पूरी दुनियाँ के सूफी संगीतकार कवि कलाकार विविधता में एकता का परिचय दे रहें

– एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी,

वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान एक धर्मनिरपेक्ष देश के रूप में होती है, जहां विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं के लोग आपसी सद्भाव और प्रेम से रहते हैं। इस सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत संगम सूफी संगीत महोत्सव जहान-ए-खुसरो में देखने को मिलता है, जिसका 25वां संस्करण 28 फरवरी से 2 मार्च 2025 तक दिल्ली के सुंदर नर्सरी में आयोजित हो रहा है।

सूफी संगीत की रूहानी परंपरा

जहान-ए-खुसरो महोत्सव का नाम अमीर खुसरो के नाम पर रखा गया है, जो सूफी परंपरा के महान कवि और संगीतकार थे। उनकी कविताएं और रचनाएं प्रेम, भक्ति और अध्यात्म का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करती हैं। अमीर खुसरो ने भारत की संस्कृति और संगीत को अपने शब्दों में कुछ यूं व्यक्त किया –

“खुसरो दरिया प्रेम का, सो उलटी वा की धार।
जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार।”

25 वर्षों की सांस्कृतिक यात्रा

यह महोत्सव वर्ष 2001 में प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और कलाकार मुज़फ़्फ़र अली द्वारा शुरू किया गया था। बीते 25 वर्षों में यह महोत्सव एक सांस्कृतिक आंदोलन बन चुका है, जो सूफी परंपरा को पुनर्जीवित करने और उसकी शिक्षाओं को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करने का कार्य कर रहा है।

दुनिया भर के कलाकारों का संगम

इस महोत्सव में रूमी, अमीर खुसरो, बाबा बुल्ले शाह और लल्लेश्वरी जैसे महान संतों की शिक्षाओं को संगीत, कविता और नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। इस वर्ष का महोत्सव “विविधता में एकता” विषय पर केंद्रित है, जिसमें पूरी दुनिया के सूफी संगीतकार, कवि और कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से प्रेम और शांति का संदेश देंगे।

प्रधानमंत्री की उपस्थिति से बढ़ा मान

28 फरवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महोत्सव में शिरकत की और कहा –
“भारत आध्यात्मिकता, कला और संस्कृति से समृद्ध भूमि है। सूफी संगीत समाज और राष्ट्रों के बीच शांति, सद्भाव और मैत्री का सेतु बनाता है।”

उन्होंने रमजान की मुबारकबाद देते हुए जहान-ए-खुसरो को वसुधैव कुटुंबकम की भावना को साकार करने वाला आयोजन बताया।

TEH बाजार और सांस्कृतिक गतिविधियां

महोत्सव के दौरान TEH बाजार नामक शिल्प प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया, जिसमें भारत की समृद्ध विरासत शिल्प, साहित्यिक चर्चाएं, फिल्म स्क्रीनिंग और सूफी-प्रेरित पाक कला का अनुभव प्रस्तुत किया गया।

विकास भी, विरासत भी

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आयोजन उनकी “विकास भी, विरासत भी” नीति को मजबूती देता है, जो भारत की प्रगति के साथ उसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जड़ों को संरक्षित रखने पर बल देता है।

अमीर खुसरो की विरासत

हजरत अमीर खुसरो को “तूती-ए-हिन्द” कहा जाता है। उन्होंने अपनी किताब नुह-सिप्हर में भारत की महानता और संस्कृत भाषा की प्रशंसा की है। उनकी कव्वालियां, गीत और रचनाएं आज भी भारत की सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं।

निष्कर्ष

अगर हम पूरे विवरण का अध्ययन करें तो पाएंगे कि जहान-ए-खुसरो महोत्सव केवल एक संगीत कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रेम, शांति और आध्यात्मिकता का संदेशवाहक सांस्कृतिक आंदोलन है। यह महोत्सव दुनिया को यह संदेश देता है कि विविधता में ही एकता है और भारत की तहज़ीब ही उसकी असली पहचान है।

संकलनकर्ता लेखक:क़र विशेषज्ञ, स्तंभकार, साहित्यकार, अंतरराष्ट्रीय लेखक, चिंतक, कवि, संगीत माध्यमा, सीए (एटीसी), एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया, महाराष्ट्र

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

error: Content is protected !!