बेमौसमी बारिश से खराब हुई फसल व कृषि भूमि पर राहत की मुरहम के बजाय पोर्टल के जंजाल में उलझा रही भाजपा जजपा सरकार : रणदीप सुरजेवाला

कहा : 2 मार्च व 3 मार्च की बेमौसमी ओलावृष्टि बारिश से हरियाणा में 23 लाख एकड़ कृषि भूमि का हुआ नुकसान

सीधे सीधे दो स्लैब में 50 से 100 प्रतिशत ख़राबे का मुआवज़ा ₹30,000 प्रति एकड़ व 50 प्रतिशत से कम ख़राबे का मुआवज़ा ₹15,000 प्रति एकड़ दें भाजपा जजपा सरकार

कैथल, 06 मार्च 2024 – हरियाणा की भाजपा जजपा सरकार ने किसानों के साथ विश्वासघात व छल किया है। किसान व मजदूर के अरमानों को लूटने का षड्यंत्र किया गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महासचिव व सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कैथल से एक बयान जारी करते हुए कहा कि आज हरियाणा का किसान, मजदूर व व्यापारी त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रहा है। 2 मार्च व 3 मार्च की बेमौसमी ओलावृष्टि बारिश से हरियाणा में 23 लाख एकड़ कृषि भूमि का नुकसान हुआ है। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी भाजपा जजपा सरकार द्वारा एक बार फिर से राहत की मरहम की बजाय किसान को “पोर्टल के जंजाल” में उलझाया जा रहा है।

सुरजेवाला ने कहा कि अभी इसी साल जून- जुलाई महीने में गुहला-चीका, कुरुक्षेत्र, शाहबाद, अम्बाला, यमुनानगर सहित हरियाणा के कोने कोने में लगभग 12 जिले और 1000 गाँव बाढ़ से प्रभावित हुए, लगभग 30 लोग मौत के शिकार हुए, हजारों लोगों को घर और गाँव छोड़कर दूसरी जगह शरण लेनी पड़ी। पूरे प्रदेश में 3,50,000 एकड़ से अधिक कृषि भूमि बाढ़ की चपेट में आई। सैकड़ों-हजारों मवेशी बाढ़ में बह गए। किसान के हजारों ट्यूबवेल खत्म हो गए। हजारों घर जलमग्न हुए। गाँव के गरीबों व किसानों का सारा सामान व खेती-बाड़ी के उपकरण खत्म हुए।

लेकिन भाजपा-जजपा सरकार ने आज तक न बाढ़ ग्रस्त एरिया के किसानों को मुवावजा दिया और न ही उन किसानों की कोई सूध ली। बल्कि उस बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में दोबारा से लगाईं गई फसल और आज जब वो पककर तैयार हो गई तो निर्दयी व तानाशाही भाजपा-जजपा सरकार ने मंडियो में खरीद बंद तक कर दी थी।

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भाजपा जजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों की बदहाली के लिए खट्टर सरकार की 10 साल की अनदेखी व लापरवाही जिम्मेवार है। अगर सीएम व डिप्टी सीएम 10 साल से हैलीकॉप्टर से उतर कर सड़क पर चल रहे होते, तो हरियाणा प्रदेश को ये दिन न देखने पड़ते।

सुरजेवाला ने कहा कि खट्टर सरकार से हमारी मांग हैं कि वो ‘‘कुंभकर्णी नींद से जागे तथा सीधे तौर से बताएं कि :-

▪️क्या 15 दिन में किसान को मुआवजा देंगे?
▪️क्या किसान को 0 से 100 प्रतिशत ख़राबे की अनेकों श्रेणीयों(स्लैब) में उलझा कर उसे फिर दर दर धक्के खाने पड़ेंगे?
▪️क्या सीधे सीधे दो स्लैब में मुआवज़ा नहीं दिया जा सकता – 50 से 100 प्रतिशत ख़राबे का मुआवज़ा ₹30,000 प्रति एकड़ व 50 प्रतिशत से कम ख़राबे का मुआवज़ा ₹15,000 प्रति एकड़?
▪️क्या चाहे तो सरकार 7 दिन में गिरदावरी कर अगले 7 दिन में मुआवज़ा नहीं दे सकती ?
▪️अगर नहीं तो क्या मान लें कि खट्टर-दुष्यंत की जोड़ी की मंशा मुआवज़ा देने की है ही नहीं?
▪️जब पिछले तीन साल का ख़राबे का ₹400 करोड़ से अधिक मुआवज़ा किसान को नहीं मिला तो अब किसान क्या उम्मीद रखे?
▪️क्या लटकाना और भटकाना ही अब सरकार की नीति है?