-प्रदेशभर में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से चल रहे हैं दस हजार से अधिक निजी प्ले स्कूल, बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़
-स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ने महिला एवं बाल विकास विभाग पंचकूला से मांगी थी आरटीआई मेें जानकारी

भिवानी, 27 सितंबर। प्रदेशभर के 22 जिलों में से सिर्फ 8 जिलों में 91 निजी प्ले स्कूलों के पास ही मान्यता है। जबकि प्रदेशभर के 22 जिलों में धड़ल्ले से नियमों को ताक पर रखकर करीब 10 हजार से अधिक निजी प्ले स्कूल चल रहे हैं। बिना मान्यता के चल रहे निजी प्ले स्कूलों में बच्चों की जिंदगी से भी खिलवाड़ हो रहा है, क्योंकि इन निजी प्ले स्कूलों के पास न तो फायर सेफ्टी की एनओसी हैं न संबंधित किसी भी विभाग के कोई नियम पूरे किए गए हैं। ऐसे में अगर कोई हादसा होता है तो इसका जिम्मेवार कौन होगा? यह भी प्रशासन और सरकार के लिए यक्ष प्रश्र बना है। 

स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने महिला एवं बाल विकास विभाग पंचकूला मुख्यालय से जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सूचना मांगी थी। जिसमें पूछा गया था कि प्रदेशभर में जिला वार कितने निजी प्ले स्कूलों की मान्यता विभाग से ली गई है। इस पर जिला वार विभाग ने निजी प्ले स्कूलों की मान्यता संबंधी सूचना मुहैया कराई। जिसमें 8 जिलों में विभाग से सिर्फ 91 निजी प्ले स्कूल ही मान्यता प्राप्त हैं। जबकि प्रत्येक जिले के गली मोहल्लों के अंदर रिहायशी मकानों में भी प्ले स्कूल धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं। जिनके अंदर बच्चों की सुरक्षा के कोई भी मानक पूरे नहीं हैं। करीब दस हजार से अधिक निजी प्ले स्कूल ऐसे हैं, जिनका महिला एवं बाल विकास विभाग के पास मान्यता संबंधी कोई दस्तावेज या सूचना तक नहीं है। 

ये हैं जिला वार निजी प्ले स्कूल

जिला- मान्यता प्राप्त निजी प्ले स्कूल

1. पानीपत- 02 2. चरखी दादरी- 06 3. जींद- 19 4. हिसार- 12 5. भिवानी- 15 6. रेवाड़ी- 02

7. यमुनानगर- 10 8. नारनौल- 25

सरकार आदेश जारी कर भूली, मासूम बच्चों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़

स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा जारी दिशा निर्देश की पालना के लिए हरियाणा सरकार द्वारा नवंबर 2022 में गाइडलाइन जारी की गई थी। सरकार अपने ही आदेशों को जारी कर भूल गई है। निजी प्ले स्कूलों के मापदंड और इनकी मान्यता संबंधी नियम पूरे नहीं किए जाने के बावजूद मनमर्जी से प्ले स्कूल खोले जा रहे हैं। इस पर भी सरकार कोई कड़ा संज्ञान या फिर कार्यवाही तक नहीं कर रही है। प्रदेश में छोटे बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है, क्योंकि पहले भी इस तरह के कई हादसे हुए हैं, जिनमें मासूम बच्चों की जान तक चली गई है।

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