Tag: प्रियंका सौरभ …….रिसर्च स्कॉलर

“हैप्पी होली” के मैसिज ने ली दिल से जुड़े रिश्ते की जगह…. नीरस होती होली

आज हम जो होली मनाते हैं, वह पहले की होली से काफ़ी अलग है। पहले, यह त्यौहार लोगों के बीच अपार ख़ुशी और एकता लेकर आता था। उस समय प्यार…

महिला पुरस्कारों की गरिमा और निष्पक्षता पर उठते प्रश्न

-प्रियंका सौरभ हमारे बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में, महिला पुरस्कारों की महत्ता और उनकी निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। हाल ही में हरियाणा में महिला दिवस के…

भारतीय समाज में मासिक धर्म अभी तक कलंकित क्यों?

भारत के पास मासिक धर्म स्वास्थ्य के प्रति अधिक समावेशी और दूरदर्शी दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हुए सांस्कृतिक विचारों का सम्मान करने का अवसर है। आपके क्या विचार हैं-क्या सरकार…

विलंब के कारण न्याय से वंचित : न्यायालयों में अनसुलझे मामलों की बढ़ती हुई संख्या

भारतीय न्यायालयों में अनसुलझे मामलों का मुद्दा एक बड़ी चुनौती है, जिसने न्याय प्रणाली को गहराई से प्रभावित किया है। लंबित मामलों की बढ़ती संख्या न्याय प्रदान करने के लिए…

(परंपरा से आतंक तक) …….. क्यों क्रूर बदमाशी का रूप ले रही है रैगिंग?

रैगिंग को अक्सर एक संस्कार के रूप में प्रस्तुत किया जाता है जो नए छात्रों को उच्च शिक्षा संस्थानों में परिसर में जीवन को समायोजित करने में सहायता करता है।…

लोककला के नाम पर अश्लीलता का तड़का …….

अश्लीलता फैलाने वाले कलाकारों पर लगे बैन, ग़लत दृश्य दिखाना, अश्लील नाटकों-गीतों का मंचन समाज से खिलवाड़ एक ओर जहाँ कई लोग संस्कृति को प्रमोट करने के लिए अपना करियर,…

विवाह के झूठे वादों से दुष्कर्म के बढ़ते मामले

हाल के वर्षों में बलात्कार के ऐसे मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिनमें अभियुक्त पर बलात्कार का आरोप लगाया जाता है। इन मामलों में, एक पुरुष जिसने एक…

अत्यधिक महत्वकांक्षा से टूटती परिवार के रिश्तों की डोर

बिखर रहे चूल्हे सभी, सिमटे आँगन रोज। नई सदी ये कर रही, जाने कैसी खोज॥ पिछले कुछ समय में पारिवारिक ढांचे में काफ़ी बदलाव हुआ है। मगर परिवारों की नींव…

परीक्षा पर चर्चा विशेष ……. हमेशा जीवन बोलना चाहिए, मार्क्स नहीं

परीक्षा पर चर्चा 2025 सकारात्मक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करती है, जो परीक्षा के तनाव को कम करती है। छात्रों में आत्म-सुधार और जिज्ञासा को बढ़ावा देती है। शैक्षणिक कठिनाइयों का…

भीख मांगने की प्रथा …………. मदद की गुहार या एक सुनियोजित धंधा?

भारत में भीख मांगना धार्मिक दान से जटिल सामाजिक-आर्थिक समस्या बन गई है। व्यस्त सड़क पर, हाथ बढ़ाना मदद के लिए पुकार जैसा लग सकता है, लेकिन इसमें अक्सर व्यवस्थित…

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