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धनखड़ को डाउन करने के लिए सुभाष बराला को बनाया था सार्वजनिक उपक्रम ब्यूरो का चेयरमैन
नए नियुक्त किए गए चेयरमैन में बराला सबसे अधिक शक्तिशाली पद पर बैठे
दूसरे चेयरमैन को अपने काम के लिए बराला से लेनी होगी अप्रूवल
पहलवानों के शिष्ट मंडल से भी मुख्यमंत्री बरोदा चुनाव में हर दाव आजमाने की कही थी बात

भारत सारथी/ऋषि प्रकाश कौशिक

पहले से ही अपनी राजनीतिक चाल के लिए मशहूर माने जाने वाले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल बीजेपी में अपनी पसंद के नेता को शक्तिशाली बनाने के साथ बरोदा में भी कोई ना कोई चाल चल रहे है।

मुख्यमंत्री ने पहले अपनी पसंद के नेता और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला को सार्वजनिक उपक्रम ब्यूरो का चेयरमैन बनाकर नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनखड़ को डाऊन करने की साजिश रची। इतना ही नहीं खट्टर ने भले ही बीजेपी और जेजेपी के कुल 14 नेताओं को चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का पद दे दिया हो, लेकिन असल में जितने भी चेयरमैन बनाए गए उनमें सबसे शक्तिशाली सुभाष बराला है। बराला को सावर्जनिक उपक्रम ब्यूरो का चेयरमैन बनाए जाने के बाद अब दूसरे चेयरमैन अपनी इच्छा से कोई भी काम नहीं कर पाएंगे। अपने काम के लिए उन्हें बराला से अनुमति लेनी होगी या ये कहें कि बीजेपी और जेजेपी नेताओं को चेयरमैन बनाकर मुख्यमंत्री ने उन्हें सरकार के साथ जोड़े रखने की अपनी राजनीतिक चाल चली है।

ऐसा ही कुछ अब मनोहर लाल खट्टर बरोदा के उपचुनाव में भी रोजाना कोई ना कोई साजिश रचकर कर रहे है। इसका खुलासा मनोहर लाल ने खुद 15 अक्तूबर को दिल्ली के हरियाणा भवन में उनसे मिले पहलवानों के सामने भी किया था। उस दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने साफ तौर दुश्मन शब्द का इस्तेमाल करते हुए बरोदा चुनाव को जीतने के लिए सीधे तरीके से चुनाव लड़ने के साथ कईं प्रकार के दाव पेंच भी चलने की बात कही थी। दाव पेंच का मतलब साफ है कि बरोदा का चुनाव लड़ने के लिए कई प्रकार की साजिश या चाल चलनी पड़ेगी, जिस पर बीजेपी के नेताओं ने अब काम करना भी शुरू कर दिया है।

बीजेपी ने अपनी चाल चलते हुए वोटों को बांटने के लिए पंचायती उम्मीदवार के तौर पर कपूर नरवाल को खड़ा किया, लेकिन जब हलके के कुछ गांवों के लोगों ने मिलकर कपूर नरवाल को समझाने की कोशिश की तो बीजेपी के एजेंटों ने हो हल्ला कर बाद को रफा-दफा कर दिया । बरोदा के लोगों का साफ तौर पर कहना है कि कपूर नरवाल तो अपना नामांकन वापिस लेने को तैयार है, लेकिन बलराज कुंडू के साथ भाले राम नरवाल और जोगेंद्र मोर जैसे छुपे हुए बीजेपी के एजेंट उन्हें ऐसा नहीं करने दे रहे हैं। यहीं कारण है कि कपूर नरवाल के नामांकन वापसी को लेकर हुई पंचायत में भी बीजेपी के कुछ एजेंटों ने हो हल्ला कर उसे खराब करने का काम किया।

ये तो अभी शुरूआत भर ही है। जैसे-जैसे आने वाले समय में चुनाव प्रचार तेज होगा, वैसे-वैसे बीजेपी की ओर से कई और साजिश भी रची जाएगी। इतना ही नहीं चर्चा तो ये भी है कि बीजेपी का आईटी सेल अपने विरोधी उम्मीदवारों खासकर कांग्रेस उम्मीदवार की छवि को धूमिल करने के लिए कोई फर्जी वीडियो भी जारी कर सकती है.

दूसरी ओर की बात करें तो कांग्रेस भी चुप तो बैठने वाली नहीं है। जैसे-जैसे ज्ञात हो रहा है, बीजेपी की चालों को समझ उनकी काट ढूंढने की कोशिश कर रही है और साथ ही भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपनी रणनीति बनाने में लगे हुए हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि एक ओर तो बीजेपी कपूर के घर वालों को चुनाव लड़ने के लिए उकसा रही है तो दूसरी ओर भूपेंद्र सिंह हुड्डा और भालू के समर्थक कपूर सिंह नरवाल को चुनाव ना लड़ने के लिए समझाने की बात कर रहे हैं।

अब तक जो हमारे सूत्रों से ज्ञात हुआ है, वह यह है कि कपूर सिंह का फैसला कुछ भी हो सकता है। वैसे ज्यादा यही लगता है कि कपूर सिंह चुनाव नहीं लड़ेंगे और सुबह अपना नामांकन वापस ले लेंगे। लेकिन यह सब आज रात में चलने वाली गतिविधियों पर निर्भर करेगा। अब यह तो बरोदा की जनता को ही तय करना है कि वह किस के सर पर जीत का ताज रखती है। जैसा कि वर्तमान में दिखाई दे रहा है कि भाजपा खेमे में वह गरमी नहीं दिखाई दे रही जो चुनाव घोषित होने से पहले दिखाई दे रही थी। उधर, कांग्रेस खेमे में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है। खैर! कल का दिन निर्णय करेगा कि क्या होने वाला है? हां! एक बात अवश्य है कि यदि कपूर ने नाम वापस ले लिया तो यह चुनाव एक तरफा नजर आएगा, कांग्रेस के पक्ष में।

लेकिन बीजेपी ओर कांग्रेस की इन साजिशों के बीच अब बरोदा की जनता को फैसला करना होगा कि वे किसका साथ देती है। अब बरोदा की जनता को तय करना होगा कि वे बीजेपी का साथ देती है या फिर कांग्रेस का।

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