खेड़ा खुरमपुर में खुले में औद्योगिक कचरा जलाने का आरोप, निरीक्षण और कार्रवाई की मांग
फरुखनगर/गुरुग्राम, 22 अक्टूबर। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुखबीर जे तंवर ने खेड़ा खुरमपुर क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों द्वारा खुले में कचरा जलाए जाने का आरोप लगाते हुए सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। क्षेत्र में कचरा प्रबंधन की स्थिति का जायजा लेने के बाद उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर किसानों पर सख्ती की जाती है, जबकि औद्योगिक इकाइयों की कथित अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।
तंवर ने आरोप लगाया कि कुछ औद्योगिक इकाइयां निर्धारित मानकों के अनुरूप कचरे का निस्तारण करने के बजाय उसे खुले में जला रही हैं। उन्होंने क्षेत्र की स्थिति को ‘गैस चैंबर जैसे हालात’ बताते हुए कहा कि दूषित हवा से स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ रही है। विशेष रूप से सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के स्वास्थ्य को लेकर उन्होंने चिंता जताई।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
तंवर ने बताया कि पिछले सप्ताह हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के गुरुग्राम दक्षिण क्षेत्रीय अधिकारी और फरुखनगर के खंड विकास अधिकारी के संज्ञान में यह मामला लाया गया था। उनका आरोप है कि इसके बावजूद खुले में औद्योगिक कचरा जलाने पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
उन्होंने कहा, “सरकार को सैटेलाइट के माध्यम से किसान की जलती पराली दिखाई दे जाती है, लेकिन औद्योगिक इकाइयों द्वारा खुले में जलाया जा रहा कचरा क्यों दिखाई नहीं देता?” उन्होंने दावा किया कि संबंधित क्षेत्र के किसान पराली नहीं जला रहे हैं। तंवर ने सवाल उठाया कि क्या प्रदूषण नियंत्रण के नियम केवल किसानों के लिए हैं और औद्योगिक इकाइयों की कोई जवाबदेही नहीं है।
नियमित निगरानी और सुरक्षित निस्तारण की मांग
तंवर ने सरकार और स्थानीय प्रशासन से क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों का तत्काल निरीक्षण कराने तथा नियमों का उल्लंघन कर खुले में कचरा जलाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में वायु गुणवत्ता की नियमित और पारदर्शी निगरानी होनी चाहिए। साथ ही औद्योगिक कचरे के सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण में दोहरे मापदंड स्वीकार्य नहीं हैं। “स्वच्छ हवा कोई विलासिता नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा अधिकार है।” तंवर ने सरकार से जनहित में तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की।









