श्रीराम का जीवन सत्य और धर्म का शाश्वत संदेश : डॉ. मिश्र

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मातृभूमि शिक्षा मंदिर में विजय संवाद आयोजित, युवाओं से सामाजिक बुराइयां मिटाने का आह्वान

थानेसर, 20 अक्टूबर (संजीव कुमारी)। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जीवन परोपकार, मर्यादा, सत्य, न्याय और समाज कल्याण का शाश्वत संदेश देता है। विजयादशमी की सार्थकता केवल रावण दहन में नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों को समाप्त कर समाज और देश की उन्नति के लिए कार्य करने में है। ये विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने विजयादशमी एवं दशहरा पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित विजय संवाद कार्यक्रम में व्यक्त किए।

मातृभूमि सेवा मिशन के तत्वावधान में मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्रीराम की स्तुति से हुआ। शिक्षा मंदिर के ब्रह्मचारियों ने श्रीराम धुन सहित विभिन्न प्रस्तुतियों से वातावरण भक्तिमय बना दिया। धर्मराज यादव एवं श्रीमती माया विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अहंकार पर मर्यादा की विजय

डॉ. मिश्र ने कहा कि भारतीय संस्कृति वीरता और शौर्य की उपासक रही है। इसकी सांस्कृतिक परंपराओं की गूंज विदेशों तक सुनाई देती है। उन्होंने कहा कि हर युग में अन्याय, अहंकार और अत्याचार जैसी बुराइयां रही हैं, लेकिन विजयादशमी हमें अधर्म पर धर्म की विजय का विश्वास दिलाती है।

उन्होंने कहा कि रावण की सत्ता में स्वार्थ और अहंकार का प्रभाव था, जबकि श्रीराम का जीवन और संघर्ष लोककल्याण के लिए समर्पित था। दशहरे पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि रावण के पुतले के साथ अपने भीतर के अहंकार, द्वेष और अन्य बुराइयों का भी त्याग करेंगे। यही इस पर्व का वास्तविक संदेश है।

बदलाव की शुरुआत स्वयं से करें

डॉ. मिश्र ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि युवा देश का भविष्य हैं। उनकी सकारात्मक सोच और आचरण समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। दूसरों को बदलने की अपेक्षा करने से पहले स्वयं में बदलाव लाना आवश्यक है। हमारा अच्छा आचरण दूसरों को भी प्रेरित करता है।

उन्होंने कहा कि दशहरे के प्रति आस्था और सम्मान तभी सार्थक होंगे, जब इसके आदर्शों को दैनिक जीवन में अपनाया जाए। कार्यक्रम का समापन भगवान श्रीराम के जयघोष के साथ हुआ। इस अवसर पर नीतिका, दीपिका, शालिनी सहित आश्रम के ब्रह्मचारी और सदस्य उपस्थित रहे।

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Author: Bharat Sarathi

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