इलेवन पावर का लाइसेंस रद्द हो : विद्रोही

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बिजली वितरण में निजी कंपनी की भागीदारी पर सवाल, स्वामित्व और हिस्सेदारी की जांच मांगी

रेवाडी, 20 अक्टूबर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने गुरुग्राम और नूंह जिलों में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के समानांतर 25 वर्ष के लिए बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने की आलोचना की है। उन्होंने इसे हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण की शुरुआत बताते हुए उपभोक्ताओं और किसानों के हित में लाइसेंस रद्द करने की मांग की।

विद्रोही ने जारी बयान में आरोप लगाया कि इस निर्णय से निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने का रास्ता खोला गया है। उन्होंने हरियाणा बिजली विनियामक आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए निर्णय के पीछे राजनीतिक प्रभाव होने का आरोप लगाया। सरकार की ओर से फैसले को चुनौती देने की बात पर भी उन्होंने सवाल किया और इसे जनता को भ्रमित करने वाला कदम बताया।

निगम की आर्थिक स्थिति पर जताई चिंता

विद्रोही ने दावा किया कि डीएचबीवीएन के कुल वार्षिक राजस्व का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले गुरुग्राम जिले से आता है। उन्होंने आशंका जताई कि अधिक राजस्व वाले क्षेत्र में निजी कंपनी का प्रवेश निगम की आय और आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। उनके अनुसार, इसका असर निगम के अन्य क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति और उपभोक्ता सेवाओं पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस व्यवस्था में सार्वजनिक बिजली निगम और आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा कैसे होगी। विद्रोही ने आरोप लगाया कि निजी हितों को प्राथमिकता देने की कीमत भविष्य में किसानों और सामान्य बिजली उपभोक्ताओं को चुकानी पड़ सकती है।

कंपनी के स्वामित्व की जानकारी सार्वजनिक हो

विद्रोही ने मांग की कि इलेवन पावर के मालिकों, शेयरधारकों और उनकी हिस्सेदारी का विवरण सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कंपनी के साथ भाजपा और संघ से जुड़े नेताओं के किसी संभावित संबंध की निष्पक्ष जांच की भी मांग की।

उन्होंने कहा कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा से जुड़ा निर्णय पारदर्शी होना चाहिए। उपभोक्ताओं, किसानों और सार्वजनिक बिजली वितरण व्यवस्था के हितों को देखते हुए निजी कंपनी को दिया गया लाइसेंस रद्द किया जाए।

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Author: Bharat Sarathi

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