डीएचबीवीएन के साथ समानांतर व्यवस्था का रास्ता खुला, उपभोक्ताओं को मिलेगा अतिरिक्त विकल्प,
गुरुग्राम, 19 अक्टूबर। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह राजस्व जिलों में 25 वर्ष के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने का आदेश जारी किया है। इस निर्णय से दोनों जिलों में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के साथ एक अतिरिक्त बिजली आपूर्तिकर्ता के संचालन का रास्ता खुल गया है। इसका अर्थ डीएचबीवीएन की सेवाएं बंद होना अथवा उसके सभी उपभोक्ताओं का स्वतः निजी कंपनी में स्थानांतरण होना नहीं है।
आयोग के आदेश के अनुसार कंपनी को लाइसेंस की शर्तें स्वीकार करने की सूचना एक सप्ताह के भीतर देनी होगी। बिजली की व्यावसायिक आपूर्ति शुरू करने से पहले आवश्यक नेटवर्क, पारेषण संपर्क, वैधानिक मंजूरियों तथा अन्य निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। इसलिए लाइसेंस संबंधी आदेश जारी होने को तत्काल बिजली आपूर्ति शुरू होने की घोषणा नहीं माना जा सकता।
उपभोक्ताओं के एक आपूर्तिकर्ता से दूसरे के पास जाने की प्रक्रिया भी आयोग की स्वीकृति के अधीन होगी। कंपनी को इसके लिए 60 दिन के भीतर याचिका दाखिल करनी है। आदेश में प्रावधान है कि पुराने आपूर्तिकर्ता से बिजली तभी काटी जाए, जब नए आपूर्तिकर्ता की आपूर्ति सफलतापूर्वक चालू हो जाए, ताकि बदलाव के दौरान उपभोक्ता की बिजली बाधित न हो।
आयोग ने कंपनी पर घरेलू, कृषि और ग्रामीण उपभोक्ताओं सहित सभी श्रेणियों के प्रति सेवा दायित्व निभाने की शर्त रखी है। केवल लाभदायक उपभोक्ताओं को चुनने और अन्य श्रेणियों की उपेक्षा रोकने के लिए भी शर्तें निर्धारित की गई हैं। बिजली की दरें आयोग की मंजूरी के अधीन रहेंगी।
किस क्षेत्र में नई व्यवस्था के तहत आपूर्ति कब शुरू होगी और उपभोक्ता विकल्प कैसे चुन सकेंगे, इसकी स्पष्टता आगामी स्वीकृतियों तथा संचालन संबंधी घोषणाओं से होगी। फिलहाल मौजूदा उपभोक्ताओं के कनेक्शन और बिलिंग में तत्काल बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।
निजीकरण की दिशा में कदम?
गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण का लाइसेंस मिलने से बिजली सेवाओं में निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ने का रास्ता खुला है। ऐसे में सवाल है कि यह व्यवस्था आगे चलकर सरकारी बिजली वितरण पर क्या असर डालेगी। हालांकि, मौजूदा आदेश डीएचबीवीएन को समाप्त करने या उसका स्वामित्व निजी कंपनी को सौंपने का नहीं है। उपभोक्ताओं के लिए असली कसौटी बिजली की दरें, आपूर्ति की विश्वसनीयता, शिकायतों का समाधान और ग्रामीण तथा कृषि उपभोक्ताओं को समान सेवा मिलना होगी। इन पहलुओं पर नई व्यवस्था का प्रभाव उसके लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।








