हरियाणा में नशामुक्ति के सरकारी दावे खोखले, इलाज के अभाव में नशे की गिरफ्त से नहीं निकल पा रहे युवा : कुमारी सैलजा

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बेरोजगारी और नशे के बढ़ते जाल से युवाओं का भविष्य संकट में, कानून व्यवस्था पर भी पड़ रहा असर

नशामुक्ति केंद्रों में डॉक्टर, दवाइयों और पुनर्वास सुविधाओं का अभाव सरकार की विफलता

चंडीगढ़/सिरसा, 19 अक्टूबर। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस की महासचिव एवं सीडब्लूसी सदस्य कुमारी सैलजा ने हरियाणा में बढ़ते नशे और नशामुक्ति केंद्रों की बदहाल स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। सांसद ने कहा कि सरकार नशामुक्त हरियाणा बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के विपरीत है। बेरोजगारी, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और उपचार सुविधाओं के अभाव ने युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है। नशे के कारण परिवार बर्बाद हो रहे हैं और सामाजिक वातावरण तथा कानून व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा के नशामुक्ति केंद्रों में पिछले पांच वर्षों के दौरान करीब 1.84 लाख युवाओं ने उपचार करवाया है। प्रदेश में 134 पंजीकृत नशामुक्ति केंद्र हैं, जिनमें केवल 26 सरकारी हैं। कई केंद्रों में पर्याप्त चिकित्सक, प्रशिक्षित कर्मचारी, दवाइयां और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। यह स्थिति सरकार की नशामुक्ति नीति और स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर खामियों को उजागर करती है।

सांसद ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि जो युवा स्वयं नशा छोड़कर सामान्य जीवन में लौटना चाहते हैं, उन्हें भी समुचित उपचार, काउंसलिंग और पुनर्वास की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। निजी नशामुक्ति केंद्रों में उपचार पर भारी खर्च होने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार आर्थिक संकट झेल रहे हैं।

कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस की नीति युवाओं को नशे से बचाकर शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराने की रही है। नशे की समस्या केवल पुलिस कार्रवाई से समाप्त नहीं होगी। इसके लिए नशा तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, रोजगार के अवसर, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक जागरूकता को प्राथमिकता देनी होगी।

सांसद ने मांग की कि प्रत्येक जिले में सरकारी नशामुक्ति सुविधाओं का विस्तार किया जाए। विशेषज्ञ चिकित्सक, निशुल्क दवाइयां, मनोवैज्ञानिक परामर्श और पुनर्वास की समुचित व्यवस्था हो। निजी केंद्रों की नियमित निगरानी की जाए। सांसद ने कहा कि सरकार प्रचार और घोषणाओं के बजाय धरातल पर ठोस कदम उठाए। हरियाणा के युवाओं को नशे से बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

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Author: Bharat Sarathi

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