हर नागरिक के मन में सुरक्षा भाव पैदा करना ही रामराज्य की दिशा में पहला कदम-मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

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*भयमुक्त, नशामुक्त और खुशहाल समाज निर्माण में दें  योगदान*

*जालंधर में भगवान वाल्मीकि प्रकटोत्सव विशाल तीर्थ यात्रा को किया सम्बोधित*

चण्डीगढ, 18 अक्तूबर – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की कल्पनानुसार पंजाब की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और हर नागरिक के मन में सुरक्षा का भाव पैदा करना ही रामराज्य की दिशा में पहला कदम होगा। इस पावन अवसर पर हम सब मिलकर भगवान वाल्मीकि के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लें। उनके दिखाए समानता, समरसता और करुणा के मार्ग को अपने जीवन में उतारें और एक भयमुक्त, नशामुक्त और खुशहाल समाज के निर्माण में अपना अहम योगदान दें।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी रविवार को जालंधर में भगवान वाल्मीकि प्रकट उत्सव पर आयोजित विशाल तीर्थ यात्रा को सम्बोधित कर रहे थे। जालंधर से अमृतसर स्थित भगवान वाल्मीकि की पावन तपोभूमि श्रीराम तीर्थ के लिए यह विशाल तीर्थ यात्रा रवाना हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि कवि भगवान वाल्मीकि सम्पूर्ण मानवता के पथ प्रदर्शक, मर्यादा और सामाजिक न्याय के महान वाहक थे। उन्होंने रामायण की रचना करके समाज को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जीवन चरित्र दिया। इसके माध्यम से जीवन जीने की कला, चरित्र निर्माण और उच्च मानवीय मूल्यों की अमर सीख दी।

*वाल्मीकि ने भगवान श्रीराम की दिव्य कथा का दिया उपहार* 

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि भगवान वाल्मीकि राम नाम की गंगा बहाने वाले ऋषियों के ऋषि और योगियों के योगी थे। उन्होंने मानव समाज को भगवान श्रीराम की दिव्य कथा का उपहार दिया। राम नाम का जप करके ही वे महर्षि बने थे। हमारा परम सौभाग्य है कि हम अयोध्या में उनके हृदय सम्राट भगवान श्रीराम जी के भव्य एवं दिव्य मंदिर के निर्माण के साक्षी बने हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान वाल्मीकि ने हमें सिखाया कि कोई भी व्यक्ति जन्म से नहीं, बल्कि अपने कर्मों और विचारों से महान बनता है। उनकी शिक्षाएं हमें आदर्श समाज की स्थापना करना सिखाती हैं जिसमें कोई छोटा या बड़ा न हो तथा हर व्यक्ति को समानता और सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिले। उन्होंने कहा कि सत्ता और शासन का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा करना है। उन्होंने अपने महाकाव्य रामायण में ऐसे समाज की परिकल्पना की जिसमें दुख, भय, भेदभाव, लाचारी और अन्याय का कोई स्थान नहीं था। 

उन्होंने कहा कि जब हम भगवान वाल्मीकि का प्रकट उत्सव मना रहे हैं तो हमें उनकी शिक्षाओं के आलोक में समाज के हालात पर भी विचार करना होगा। पंजाब की यह पवित्र धरती गुरुओं, पीरों, संतों और वीरों की तपोभूमि रही है। इस धरती ने हमेशा देश को दिशा दिखाई है, देश की अन्न सुरक्षा को मजबूत किया है और सीमाओं की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर किया है।

*नागरिक, किसान, मजदूर और युवा खुद को कर रहा ठगा हुआ महसूस*

आज बड़े ही दुख और चिंता के साथ कहना पड़ता है कि वर्तमान में पंजाब जिन परिस्थितियों से गुजर रहा है, वे अत्यंत चिंताजनक हैं। आज पंजाब का युवा हताशा और नशे के जाल में फंसता जा रहा है। कानून-व्यवस्था की स्थिति चरमरा रही है और प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण समाज का आम नागरिक, किसान, मजदूर और युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। पंजाब सरकार की नीतियों और नीयत में जो दिशाहीनता और दूरदर्शिता की कमी दिख रही है, उसने पंजाब के विकास की रफ्तार को रोक दिया है।

*महर्षि वाल्मीकि का रामराज्य का संदेश आज भी प्रासंगिक*

मुख्यमंत्री ने कहा कि सच्चा शासक और सरकार वही है जो प्रजा की भलाई के लिए दिन-रात काम करे, युवाओं को सही दिशा दिखाए। समाज में सुरक्षा तथा न्याय का वातावरण बनाए। लेकिन जब सरकारें अपने वादों से मुकर जाती हैं, और युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन्हें उनके हाल पर छोड़ देती हैं, समाज में समरसता की जगह बांटने की राजनीति शुरू होती है, तब महर्षि वाल्मीकि जी का रामराज्य का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने कहा कि पंजाब में आज प्रशासनिक असफलताएं सामने आ रही हैं। चाहे वह कानून का राज स्थापित करने में विफलता हो, आर्थिक बदहाली हो, या फिर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो। यह सब इस बात का प्रमाण है कि सत्ता में बैठे लोग भगवान वाल्मीकि और हमारे महान गुरुओं की शिक्षाओं से  भटक गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान वाल्मीकि ने हमें सिखाया था कि समाज में शांति और प्रगति तभी संभव है जब समाज का हर वर्ग एकजुट हो और एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बने। पंजाब को आज फिर से उसी नैतिक और सामाजिक पुनर्जागरण की आवश्यकता है। पंजाब के युवाओं को नशे से बचाकर, उन्हें अच्छी शिक्षा, कौशल और रोजगार से जोड़ना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धा होगी।

उन्होंने कहा कि हरियाणा में गरीब परिवारों को आयुष्मान योजना से जोड़कर 40 लाख लोगों को लाभ पहुचाया जा रहा है। आज बुजुर्गो के ईलाज की चिंता सरकार कर रही है। इसके अलावा दो लाख परिवारों को मकान बनाकर देने के साथ ही महिलाओं को 2100 रुपए हर माह दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि  सरकार ने जनता से किए गए 217 संकल्प में से 76 पूरे कर दिए हैं।

*वाल्मीकि के विचारों पर चलते हुए प्रधानमंत्री मोदी के सबका साथ-सबका विकास के मूलमंत्र को अपनाया*

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा और पंजाब केवल पड़ोसी राज्य नहीं हैं, बल्कि हम एक ही शरीर की दो भुजाएँ हैं। हमारा खान-पान, इतिहास और संस्कृति एक हैं। हरियाणा में भाजपा सरकार ने भगवान वाल्मीकि और सभी महान संतों के विचारों पर चलते हुए प्रधामनंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सबका साथ-सबका विकास के मूलमंत्र को अपनाया है। अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे अयोध्या का नामकरण महर्षि वाल्मीकि के नाम पर किया है ताकि हमारे महापुरूषों की शिक्षाएं जन जन तक पंहुचाई जा सके। 

सरकार ने हर वर्ग का कल्याण, युवाओं को पारदर्शी तरीके से बिना पर्ची-बिना खर्ची के नौकरियां देने और गरीब से गरीब व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया है। जबकि पंजाब में युवाओं को नौकरियों की बजाय नशे की पुड़िया पकड़ाने का कार्य किया जा रहा है। पड़ोसी पंजाब भी खुशहाल और समृद्ध हो तथा यहाँ का हर नागरिक प्रगति की राह पर आगे बढे, यह बदलाव तभी संभव होगा, जब हम झूठे दावों और लोकलुभावन वादों से बाहर निकलकर सुशासन, विकास, ईमानदारी और नीयत पर आधारित राजनीति को चुनेंगे। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा की नीतियां पंजाब, पंजाबियत और सिख गुरुओं के उच्च आदर्शों के प्रति समर्पित रही हैं। इसलिए पंजाब के लोग भी विकास केंद्रित सोच अपनाएं, ताकि केंद्र और राज्य के तालमेल से खुशहाल, नशामुक्त और समृद्ध समाज का निर्माण हो सके। इसके लिए नशे के खिलाफ जंग, सामाजिक समानता और भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प लेना होगा और पंजाब को फिर से रंगला, हंसता खेलता और प्रगतिशील पंजाब बनाना है। भगवान वाल्मीकि जी के आशीर्वाद से पंजाब इन संकटों से बाहर निकलेगा और फिर से देश का सिरमौर राज्य बनेगा।

कार्यक्रम के मुख्य आयोजक एवं भगवान वाल्मीकि उत्सव समिति के अध्यक्ष विपन सभरवाल, महामंडलेश्वर बंसीदास, केशवदास, बाबा राजकिशोर, जगजीत सिंह महाराज, अमरजीत कादरी, जिला अध्यक्ष अशोक सरीन, बृजिन्दर सिंह हमदर्द, स्थानीय धार्मिक संगठनों के सम्मानित पदाधिकारीगण, संत एवं भारी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

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Author: Bharat Sarathi

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