अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर 80 वर्ष पूरे करने वाले सदस्यों और 95 वर्षीय एच. पी. सरदाना का सम्मान; सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

हिसार, 1 अक्टूबर। उम्र के अनुभव, जीवन के उल्लास और आपसी आत्मीयता का सुंदर संगम वानप्रस्थ सीनियर सिटीज़न्स क्लब में देखने को मिला, जहां अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। वरिष्ठ सदस्यों ने भजन, समूह नृत्य, गीत, एकल अभिनय और रैंप वॉक के माध्यम से अपनी प्रतिभा व सक्रियता का परिचय दिया। नगर निगम के पार्षद राजेश अरोड़ा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे।
क्लब के प्रवेश द्वार पर डॉ. सुदर्शन के निर्देशन में बच्चों द्वारा बनाई गई रंगोली ने आयोजन की सुंदरता बढ़ाई। स्नेह और सम्मान से भरे वातावरण में सदस्यों ने एक-दूसरे को इस विशेष दिवस की शुभकामनाएं दीं।
अनुभव और ऊर्जा से समाज को दिशा देते हैं वरिष्ठजन
क्लब के महासचिव डॉ. जे. के. डांग ने मुख्य अतिथि और सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि जीवन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव को सम्मान और गरिमा के साथ जीने का संदेश भी देता है।

उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1990 में 1 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस घोषित किया था और पहली बार इसे वर्ष 1991 में मनाया गया। इसका उद्देश्य वृद्धजनों के योगदान, अधिकारों और गरिमा के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना है।
डॉ. डांग ने कहा कि वरिष्ठजन केवल समाज के लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि अपने अनुभव और ऊर्जा से समाज व देश के विकास में सक्रिय भागीदार भी हैं। वानप्रस्थ इसका सुंदर उदाहरण है, जहां स्वास्थ्य, मित्रता, सेवा और सक्रिय जीवन के साथ बढ़ती उम्र को आनंदपूर्वक जीने का प्रयास किया जाता है।
‘वरिष्ठजनों का सम्मान, हमारी संस्कृति की पहचान’
डॉ. दवीना अमर ठकराल ने रोचक और प्रभावशाली शैली में मंच संचालन किया। कार्यक्रम का आगाज करते हुए उन्होंने कहा, “वरिष्ठजनों का सम्मान—हमारी संस्कृति की पहचान। उनका अनुभव—हमारी धरोहर। उनके संस्कार—हमारी विरासत।”
उन्होंने वरिष्ठजनों को जीवन का दीपस्तंभ बताते हुए कहा कि उनके अनुभव हमारी राहें रोशन करते हैं, उनके स्नेह से परिवार महकते हैं और उनके संस्कारों से पीढ़ियां समृद्ध होती हैं। घर में बुजुर्गों की उपस्थिति तीर्थ के समान है और उनकी छाया में पलना सौभाग्य है। उनके अनुभव जीवन की अनमोल पुस्तक हैं।
डॉ. दीप पूनिया ने मधुर भजन प्रस्तुत कर कार्यक्रम का भावपूर्ण शुभारंभ किया।

80 वर्ष पूरे करने वाले सदस्यों का सम्मान
इस वर्ष 80 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले डॉ. सतीश कालड़ा, डॉ. हेम राज शर्मा और एस. एस. लाठर को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। सम्मानित सदस्यों ने अपने जीवन के अनुभव साझा किए। वहीं, 95 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके एच. पी. सरदाना को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
क्लब की गतिविधियों में नियमित सहभागिता के लिए पुरुष वर्ग में डॉ. अमृत लाल खुराना और महिला वर्ग में श्रीमती राज गर्ग को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर श्रीमती राज गर्ग के पति डॉ. एस. के. गर्ग भी उपस्थित रहे।
समूह नृत्य और एकल अभिनय ने मोहा मन
डॉ. सुनीता श्योकंद के नेतृत्व और काजल के निर्देशन में महिला सदस्यों ने सुंदर समूह नृत्य प्रस्तुत किया। इसमें श्रीमती सरोज ग्रेवाल, डॉ. सुनीता श्योकंद, श्रीमती सुनीता मेहतानी, श्रीमती कौशल जैन, डॉ. संतोष ढिल्लों, श्रीमती कमला सैनी, डॉ. इंदु गेहलावत, डॉ. पूनम कुंडू, श्रीमती मंजू, श्रीमती सुनीता बहल, श्रीमती पुष्पा शर्मा, डॉ. सुदेश गांधी, डॉ. सुनीता जैन और डॉ. सुदर्शन मेहता ने भाग लिया।
श्रीमती स्नेह चौधरी ने अपनी स्वरचित प्रस्तुति ‘नारी की व्यथा’ पर प्रभावशाली लघु नाटिका प्रस्तुत की। एकल अभिनय के माध्यम से उन्होंने महिला जीवन के विभिन्न पहलुओं और उसकी पीड़ा को संवेदनशील ढंग से सामने रखा।

महिला सदस्यों ने विभिन्न वेशभूषाओं में रैंप वॉक कर अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास का परिचय भी दिया।
गांधी के रूप में आए डॉ. डांग, तालियों से गूंजा सभागार
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण वह क्षण रहा, जब डॉ. जे. के. डांग महात्मा गांधी के रूप में रैंप पर आए। उपस्थित सदस्यों ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका अभिनंदन किया और आत्मीयता से उन्हें ‘नवयुग के गांधी’ कहकर संबोधित किया।
इसके बाद डॉ. आर. के. सैनी के निर्देशन में ‘मेरे देश में पवन चले पुरवाई…’ समूह गीत की सुंदर प्रस्तुति दी गई। इसमें डॉ. आर. के. सैनी, डॉ. एस. एस. धवन, डॉ. एम. एस. मलिक, डॉ. एम. एस. राणा, डॉ. आर. एस. हुड्डा, डॉ. पुष्पा खरब, डॉ. दीप पूनिया, श्रीमती सुनीता बहल, श्रीमती कमला सैनी, श्रीमती वीना अग्रवाल, श्रीमती रमा मुंजाल, श्रीमती कौशल जैन, श्रीमती सरोज ग्रेवाल और श्रीमती आदेश मलिक ने भाग लिया।
क्लब की सुविधाओं के लिए सहयोग का आश्वासन
मुख्य अतिथि पार्षद राजेश अरोड़ा को पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने क्लब का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वानप्रस्थ में आना उन्हें सदैव अच्छा लगता है। उन्होंने क्लब की सुविधाओं के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया और कहा कि नगर निगम की ओर से भी पूरा सहयोग मिलता रहेगा।
प्रभावशाली मंच संचालन के लिए डॉ. दवीना अमर ठकराल तथा आयोजन को सफल बनाने में विशेष योगदान के लिए डॉ. नीलम परुथी, डॉ. एम. एस. चौहान, डॉ. राजेंद्र जैन, अशोक खट्टर, श्रीमती कमला सैनी, डॉ. सुदर्शन मेहता और श्रीमती सुनीता बहल को सम्मानित कर धन्यवाद दिया गया।
केवल एक दिन नहीं, प्रतिदिन मिले स्नेह और सम्मान

क्लब के प्रधान डॉ. एस. के. अग्रवाल ने मुख्य अतिथि, सदस्यों और आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के इतिहास और महत्व पर भी प्रकाश डाला।
समापन की ओर बढ़ते हुए मंच संचालिका डॉ. दवीना अमर ठकराल ने इन पंक्तियों के माध्यम से वरिष्ठजनों की विरासत को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संदेश दिया—
ज्ञान-विवेक की अमर धरोहर, इनसे हमें मिली है,
संस्कारों की पावन गंगा, इनसे ही तो चली है।
आओ इनके चरणों में हम, श्रद्धा-सुमन चढ़ाएं,
अनुभव की अमूल्य विरासत को, पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहुंचाएं॥
उन्होंने आह्वान किया कि वरिष्ठजनों को केवल किसी विशेष दिवस पर ही नहीं, बल्कि प्रतिदिन अपना स्नेह, सम्मान, समय और संवेदनाएं दें।
कार्यक्रम के पश्चात सभी सदस्यों ने मिलकर जलपान का आनंद लिया। आपसी आत्मीयता और उल्लास के बीच आयोजन संपन्न हुआ।







