30 सितंबर और 1 अक्टूबर को काले बिल्ले लगाकर ड्यूटी; 5, 6 और 7 अक्टूबर को दो-दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल
एसोसिएशन ने महिला सुरक्षा और पारिवारिक जिम्मेदारियों का उठाया मुद्दा, हड़ताल के दौरान इमरजेंसी सेवाएं जारी रखने की बात कही

गुरुग्राम, 30 सितंबर। हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग में मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने के विरोध में नर्सिंग ऑफिसर्स ने बुधवार से शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू कर दिया। गुरुग्राम के सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल सहित जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नर्सिंग ऑफिसर्स ने काले बिल्ले लगाकर ड्यूटी की। नर्सिंग ऑफिसर वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के बैनर तले शुरू हुए आंदोलन में पॉलिसी को बिना शर्त वापस लेने की मांग की गई।
एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि सरकार ने मांग नहीं मानी तो प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा। घोषित कार्यक्रम के अनुसार पहले चरण में 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में नर्सिंग स्टाफ काले बिल्ले लगाकर काम करेगा।
दूसरे चरण में 5, 6 और 7 अक्टूबर को प्रतिदिन सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल की जाएगी। एसोसिएशन ने कहा है कि इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी।
तीन शिफ्ट की ड्यूटी, महिला सुरक्षा का सवाल
एसोसिएशन का कहना है कि नर्सिंग कैडर की कार्य परिस्थितियों को ध्यान में रखे बिना ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू करना उचित नहीं है। नर्सिंग स्टाफ सुबह, शाम और रात की तीन शिफ्टों में सेवाएं देता है। ऐसे में तबादलों का निर्णय लेते समय ड्यूटी की प्रकृति, आवागमन और महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
एसोसिएशन ने दावा किया कि देश के किसी अन्य राज्य में नर्सिंग कैडर पर ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू नहीं है। उसका तर्क है कि शिक्षा विभाग सहित कई अन्य विभागों की सामान्य दिन की ड्यूटी के मुकाबले नर्सिंग सेवाओं की जरूरतें और चुनौतियां अलग हैं। अस्पतालों में चौबीसों घंटे मरीजों की देखभाल सुनिश्चित करने में नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
परिवार से दूर तबादले बढ़ाएंगे मानसिक तनाव
नर्सिंग ऑफिसर्स ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के नर्सिंग कैडर में लगभग 95 प्रतिशत महिलाएं हैं। एसोसिएशन के अनुसार अनेक महिला कर्मचारियों पर ड्यूटी के साथ बुजुर्गों की देखभाल, बच्चों की परवरिश, शिक्षा और घर-परिवार की जिम्मेदारियां भी हैं।
उन्होंने आशंका जताई कि परिवार से सैकड़ों किलोमीटर दूर तबादले होने पर इन जिम्मेदारियों और ड्यूटी के बीच संतुलन बनाना कठिन होगा। इससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है, जिसका असर उनकी कार्यक्षमता और मरीजों की देखभाल पर भी पड़ सकता है।
सुनसान इलाकों में रात की ड्यूटी बनी चिंता
एसोसिएशन ने कहा कि हरियाणा के कई स्वास्थ्य संस्थान गांवों और कस्बों से बाहर सुनसान इलाकों में स्थित हैं। ऐसे स्थानों पर रात की शिफ्ट में पहुंचना और ड्यूटी के बाद घर लौटना महिला कर्मचारियों के लिए कठिन तथा असुरक्षित हो सकता है। शिफ्ट आधारित काम के कारण उनके आने-जाने का समय भी सामान्य कार्यालयों जैसा नहीं होता।
नर्सिंग ऑफिसर्स ने मांग की कि सरकार महिला सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए उनकी व्यावहारिक समस्याओं पर गंभीरता से विचार करे। उनका कहना है कि ऐसी पॉलिसी लागू नहीं होनी चाहिए, जिससे महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़ी मुश्किलें बढ़ें।
कोरोना काल की सेवाएं याद दिलाईं, पॉलिसी वापस लेने की मांग
नर्सिंग ऑफिसर्स ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में नर्सिंग स्टाफ अहम भूमिका निभाता है। कोरोना महामारी के दौरान भी नर्सिंग कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा की थी। ऐसे में सरकार को उनके योगदान और कार्य परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए।
एसोसिएशन ने मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को बिना किसी शर्त के तुरंत वापस लेने की मांग दोहराई। साथ ही चेतावनी दी कि मांग स्वीकार नहीं होने पर प्रदेशभर में आंदोलन और तेज किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।







