डिजिटल युग में परीक्षा की साख का सवाल: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2026 के ऐतिहासिक नियम बदलाव

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पारदर्शिता, तकनीकी निगरानी और निष्पक्षता की नई कसौटियां—क्या बदलेंगे चयन के मानक और लौटेगा अभ्यर्थियों का भरोसा?

भारत की प्रशासनिक भर्ती प्रणाली में एक ऐतिहासिक संरचनात्मक सुधार-यूपीएससी ने आईएएस-आईपीएस के लिए बदले नियम,अब बार-बार नहीं दे पाएंगे परीक्षा

आईएएस और आईएफएस को स्टेपिंग स्टोन की तरह प्रयोग करने व अपग्रेड सिंड्रोम प्रवृत्ति पर सीधा प्रहार- सीरियल अटेम्प्ट संस्कृति पर निर्णायक प्रहार सराहनीय कदम

-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर डिजिटल युग ने जहां एक ओर ज्ञान, सूचना और अवसरों को वैश्विक स्तर पर लोकतांत्रिक बनाया है, वहीं दूसरी ओर इसी तकनीक के दुरुपयोग ने परीक्षा प्रणालियों की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न भी खड़े कर दिए हैं। बीते कुछ वर्षों में भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अनेक देशों में उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, डिजिटल हैकिंग, प्रॉक्सी कैंडिडेट्स, कोचिंग–माफिया गठजोड़ और मेरिट के क्षरण जैसी घटनाओं में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।भारत में नीट, रेलवे, विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोगों और भर्ती बोर्डों की परीक्षाओं में सामने आए घोटालों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पारंपरिक नियमों और ढांचागत कमजोरियों के सहारे आधुनिक डिजिटल चुनौतियों का सामना करना अब संभव नहीं रह गया है।मैं, एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र), यह मानता हूं कि यह संकट केवल परीक्षा प्रणाली का नहीं, बल्कि प्रशासनिक नैतिकता और अवसरों की समानता का भी है।इसी पृष्ठभूमि में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा 4 फरवरी 2026 को जारी किया गया सिविल सेवा परीक्षा 2026 का नोटिफिकेशन केवल एक भर्ती विज्ञापन नहीं, बल्कि भारत की प्रशासनिक भर्ती प्रणाली में एक ऐतिहासिक संरचनात्मक सुधार के रूप में देखा जाना चाहिए।

यूपीएससी सीएसई–2026 : केवल परीक्षा नहीं, बल्कि प्रणालीगत संदेश

यह नोटिफिकेशन न केवल उम्मीदवारों के लिए नियमों में भारी परिवर्तन करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट संकेत देता है कि अब आयोग मेरिट, अवसरों की समानता, नैतिकता और सेवा–प्रतिबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए कठोर निर्णय लेने से पीछे नहीं हटेगा।यूपीएससी सीएसई–2026 के माध्यम से कुल 933 पदों पर भर्ती की जानी है, जिनमें 33 पद बेंचमार्क दिव्यांग श्रेणी के लिए आरक्षित हैं। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 4 फरवरी 2026 से प्रारंभ हो चुकी है तथा 24 फरवरी 2026 अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। आवेदन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upsconline.nic.in के माध्यम से किए जा सकते हैं।हालांकि, इस बार आवेदन भरना मात्र औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, क्योंकि नए नियमों की जटिलता और उनके दीर्घकालिक प्रभाव को समझे बिना लिया गया कोई भी निर्णय उम्मीदवार के पूरे करियर को प्रभावित कर सकता है।

केवल एक अतिरिक्त मौका : ‘सीरियल अटेम्प्ट’ संस्कृति पर निर्णायक प्रहार

इस नोटिफिकेशन का सबसे महत्वपूर्ण और विवादास्पद प्रावधान यह है कि जो उम्मीदवार सीएसई–2025 या उससे पहले किसी भी सिविल सेवा में चयनित या नियुक्त हो चुके हैं, उन्हें सीएसई–2026 या सीएसई–2027 में केवल एक बार और परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। यह अवसर भी उनके शेष बचे अटेम्प्ट्स तक ही सीमित रहेगा और इसके लिए उन्हें तत्काल सेवा से इस्तीफा देने की आवश्यकता नहीं होगी।यह नियम उस प्रवृत्ति पर सीधा प्रहार है, जिसमें उम्मीदवार एक सेवा प्राप्त करने के बाद भी बार-बार परीक्षा देकर तथाकथित “अपग्रेड सिंड्रोम” का शिकार बने रहते थे। इससे न केवल नए और प्रथम प्रयास करने वाले अभ्यर्थियों के अवसर सीमित होते थे, बल्कि प्रशासनिक ढांचे में भी अस्थिरता उत्पन्न होती थी।

आईएएस और आईएफएस : ‘स्टेपिंग स्टोन’ मानसिकता का अंत

नए नियमों के अनुसार, जो उम्मीदवार पिछली परीक्षाओं के आधार पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) या भारतीय विदेश सेवा (IFS) में नियुक्त हो चुके हैं और वर्तमान में उन सेवाओं के सदस्य हैं, वे सीएसई–2026 में शामिल होने के लिए पूर्णतः अयोग्य होंगे।यह निर्णय वैश्विक प्रशासनिक प्रणालियों के अनुरूप है, जहां शीर्ष सेवाओं को करियर का अंतिम गंतव्य माना जाता है, न कि अस्थायी पड़ाव। इसका उद्देश्य स्पष्ट है—आईएएस और आईएफएस को “स्टेपिंग स्टोन” की तरह प्रयोग करने की मानसिकता का सटीक और निर्णायक अंत।

प्रीलिम्स क्लियर, फिर भी मेन्स नहीं : समय-आधारित निष्पक्षता

यदि कोई उम्मीदवार सीएसई-2026 की प्रारंभिक परीक्षा पास कर लेता है, लेकिन उसके बाद उसे पिछली परीक्षा के आधार पर आईएएस या आईएफएस में नियुक्ति मिल जाती है और वह सेवा में बना रहता है, तो वह सीएसई-2026 की मुख्य परीक्षा में शामिल होने का पात्र नहीं रहेगा।इसी प्रकार, यदि कोई उम्मीदवार मुख्य परीक्षा के बाद लेकिन परिणाम घोषित होने से पहले आईएएस या आईएफएस में नियुक्त हो जाता है और सेवा में बना रहता है, तो उसे सीएसई–2026 के परिणाम के आधार पर किसी भी सेवा में नियुक्त नहीं किया जाएगा। यह नियम “दो नावों में पैर रखने” की प्रवृत्ति को समाप्त करता है।

आईपीएस के लिए ‘नो री–एंट्री’ नीति

नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि जो उम्मीदवार पिछली परीक्षा के आधार पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयनित या नियुक्त हो चुके हैं, वे सीएसई–2026 के परिणाम के आधार पर पुनः आईपीएस चुनने के पात्र नहीं होंगे।यह निर्णय पुलिस नेतृत्व में निरंतरता, प्रशिक्षण पर हुए निवेश की सुरक्षा और प्रशासनिक स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

ट्रेनिंग से केवल एक बार छूट : सेवा–प्रतिबद्धता का नया मानक

आईएएस, आईपीएस या किसी अन्य ग्रुप-A सेवा में चयनित उम्मीदवार सीएसई-2027 में तभी शामिल हो सकते हैं, जब उन्हें सीएसई-2026 के आधार पर आवंटित सेवा की ट्रेनिंग से केवल एक बार छूट दी गई हो। यह स्पष्ट करता है कि प्रशिक्षण अब औपचारिकता नहीं, बल्कि सेवा का अनिवार्य और सम्मानजनक अंग है।

‘नो स्टेप-नो सर्विस’:फाउंडेशन कोर्स की अनिवार्यता

नए नियमों के अनुसार, चयनित उम्मीदवार को फाउंडेशन कोर्स में शामिल होना अनिवार्य है। यदि कोई उम्मीदवार न तो ट्रेनिंग में शामिल होता है और न ही विधिवत छूट प्राप्त करता है, तो उसकी सेवा आवंटन स्वतः रद्द कर दी जाएगी।यदि कोई उम्मीदवार सीएसई–2027 में चयनित होता है, तो वह सीएसई–2026 या सीएसई–2027 में आवंटित सेवाओं में से केवल एक का ही चयन कर सकेगा। शेष सभी सेवा आवंटन स्वतः निरस्त हो जाएंगे।

दोनों चयन रद्द : अनिर्णय के विरुद्ध अंतिम चेतावनी

यदि उम्मीदवार न तो सीएसई-2026 और न ही सीएसई-2027 के आधार पर आवंटित सेवा की ट्रेनिंग में शामिल होता है, तो दोनों सेवाओं का आवंटन रद्द कर दिया जाएगा। यह दर्शाता है कि यूपीएससी अब अनिश्चितता और अनिर्णय को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।

तीसरे प्रयास से पहले इस्तीफा अनिवार्य:करियर-फाइनलिटी की अवधारणा

नोटिफिकेशन का सबसे निर्णायक नियम यह है कि जो उम्मीदवार पहले दो प्रयासों में चयनित हो चुके हैं, वे तीसरी बार परीक्षा नहीं दे सकते। यदि वे सीएसई–2028 या उसके बाद की किसी परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं, तो उन्हें वर्तमान सेवा से इस्तीफा देना अनिवार्य होगा।यह प्रावधान सिविल सेवा को एक पूर्णकालिक, प्रतिबद्ध और अंतिम करियर के रूप में स्थापित करता है।

अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से यह सुधार भारत को उन देशों की श्रेणी में स्थापित करता है, जहां सिविल सेवा को केवल नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय उत्तरदायित्व माना जाता है।जो उम्मीदवार 24 फरवरी 2026 तक आवेदन करने जा रहे हैं, उनके लिए यह आवश्यक है कि वे इस नोटिफिकेशन को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि गहराई से समझें, विश्लेषण करें और दीर्घकालिक रणनीति के साथ निर्णय लें—क्योंकि अब यूपीएससी में सफलता केवल परीक्षा पास करने का नाम नहीं, बल्कि स्पष्ट दृष्टि, नैतिक प्रतिबद्धता और सेवा–समर्पण की परीक्षा बन चुकी है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि भारतीय प्रशासनिक प्रणाली का नया युग,यूपीएससी सीएसई–2026 का यह नोटिफिकेशन केवल नियमों का संग्रह नहीं, बल्कि भारतीय प्रशासनिक भर्ती प्रणाली के नैतिक पुनर्गठन का दस्तावेज है। यह डिजिटल युग की चुनौतियों, अवसरों की समानता, प्रशिक्षण निवेश, सेवा–गरिमा और युवा प्रतिभाओं के लिए न्यायसंगत मंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक साहसिक कदम है।

-संकलनकर्ता / लेखक-कर विशेषज्ञ | स्तंभकार | साहित्यकार | अंतरराष्ट्रीय लेखक | चिंतक | कवि | संगीत माध्यमा | सीए (एटीसी)एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीगोंदिया,महाराष्ट् 

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Author: Bharat Sarathi

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