एडीसी सोनू भट्ट ने ली बैठक, विभागों को दिए समन्वय के निर्देश
वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण व कृत्रिम रिचार्ज तकनीकों पर दी प्रस्तुति

गुरुग्राम, 5 फरवरी- जिले में भूजल संरक्षण और जल संचय कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से वीरवार को लघु सचिवालय के सभागार में जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) अभियान के तहत एक अहम तकनीकी बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता एडीसी सोनू भट्ट ने करते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ जिले की जल स्थिति, भूजल स्तर में आ रही गिरावट तथा पुनर्भरण की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयासों से ही संभव है, इसलिए सभी विभाग आपसी समन्वय से योजनाओं को धरातल पर उतारें और ठोस कार्ययोजना के साथ कार्य करें, ताकि भविष्य में पानी की कमी की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
बैठक में केंद्रीय भूजल बोर्ड, जल शक्ति मंत्रालय की वैज्ञानिक ‘सी’ गार्गी वालिया ने राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण एवं प्रबंधन कार्यक्रम की संस्तुतियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने जिला भूजल पुनर्भरण योजना, ग्रामवार बीसैग मानचित्रों के माध्यम से कृत्रिम भूजल पुनर्भरण संरचनाओं की उपयुक्तता तथा भूजल रिचार्ज के वैज्ञानिक उपायों की जानकारी साझा की। साथ ही मनरेगा में किए गए संशोधनों के तहत जल संरक्षण कार्यों को गति देने पर भी चर्चा की गई।
बैठक में बताया गया कि जेएसजेबी पहल का उद्देश्य समाज और सरकार के सामूहिक प्रयासों से जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण करना है। पंचायतें, महिला स्वयं सहायता समूह, युवा, छात्र, एनजीओ और स्थानीय समुदायों को इस अभियान से जोड़कर सूक्ष्म स्तर पर लागत प्रभावी समाधान लागू किए जाएंगे। जनजागरूकता, व्यवहार परिवर्तन और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण कार्यों को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाया जाएगा।
बैठक में डिप्टी सीईओ, जिला परिषद परमिंदर सिंह, वैज्ञानिक ‘बी’, केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) चंडीगढ़ आयुष केशरवानी, डीटीपी ज्योति यादव, एक्सईएन सिंचाई विभाग मनीष छिकारा, शिक्षा विभाग से गीता आर्या तथा दीप्ति मौजूद रहीं।







