-हरियाणा में एक आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) की स्थापना की जाए
-घग्गर बेल्ट क्षेत्र में नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट की स्थापना अत्यंत आवश्यक है
चंडीगढ़/दिल्ली 30 जनवरी। हरियाणा की जनता पिछले 11 वर्षों से केवल वादों और इंतज़ार के दौर से गुजर रही है। तथाकथित डबल इंजन सरकार के दावे तो बार-बार किए गए, लेकिन वास्तविकता यह है कि इस लंबे समय में प्रदेश को एक भी ठोस नई विकास परियोजना नहीं मिल पाई, जिससे जनता को सीधा लाभ मिले। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में हालात चिंताजनक हैं। मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना को कमजोर किया गया, बजट में कटौती कर ग्रामीण गरीबों से काम का अधिकार छीन लिया गया। दूसरी ओर, किसान आज भी अपने मुआवज़े की प्रतीक्षा कर रहे हैं और बड़ी संख्या में लोग अब तक वंचित हैं। यह स्थिति बताती है कि सरकार न तो रोजगार को लेकर गंभीर है और न ही किसानों के हितों को लेकर संवेदनशील।
यह बात सिरसा की सांसद, पूर्व कैबिनेट मंत्री व कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव कुमारी सैलजा ने आज संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। उन्होंने कहा कि वे केंद्र और राज्य सरकार से पुरजोर मांग करेंगी कि हरियाणा में एक आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) की स्थापना की जाए। शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े सिरसा जिले में यदि यह महत्वपूर्ण संस्थान स्थापित किया जाता है, तो पूरे प्रदेश के विकास को नई दिशा मिलेगी और युवाओं के लिए उच्च शिक्षा एवं रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके साथ ही उन्होंने घग्गर बेल्ट में लगातार बढ़ रहे कैंसर के मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के अनेक गांवों में कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसे स्थानीय लोग कैंसर बेल्ट के रूप में पहचानने लगे हैं। प्रदूषित जल, पर्यावरणीय कारणों और जागरूकता की कमी के चलते स्थिति और गंभीर होती जा रही है। ऐसे में घग्गर बेल्ट क्षेत्र में नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट की स्थापना अत्यंत आवश्यक है, जहां जांच, शोध, रोकथाम और आधुनिक उपचार की समुचित व्यवस्था हो सके। उन्होंने कहा कि यह संस्थान न केवल हरियाणा बल्कि पंजाब और राजस्थान की सीमा से सटे क्षेत्रों के हजारों मरीजों के लिए जीवनदायी साबित होगा। समय पर जांच, सस्ती चिकित्सा सुविधा और कैंसर के कारणों पर शोध से इस क्षेत्र में बीमारी की रोकथाम की दिशा में ठोस परिणाम सामने आ सकेंगे।
कुमारी सैलजा ने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि हरियाणा के विकास, युवाओं के भविष्य और जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है, जिसे सरकार को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकार करना चाहिए।







