चंडीगढ़/रेवाडी, 29 जनवरी 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने भाजपा, आम आदमी पार्टी और केन्द्र की मोदी सरकार पर एसवाईएल नहर मुद्दे को जानबूझकर लटकाने की साज़िश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। विद्रोही ने कहा कि पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसवाईएल नहर निर्माण पर अंतिम फैसला न आए, इसके लिए सुनियोजित रणनीति के तहत मंगलवार को चंडीगढ़ में हरियाणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की बैठक करवाई गई।
उन्होंने कहा कि बैठक में समस्या के समाधान के बजाय दोनों राज्यों के अधिकारियों की एक कमेटी बनाकर मामले को लंबा खींचने का रास्ता चुना गया, जो साफ तौर पर जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है।
विद्रोही ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2020 से अब तक बीते पांच वर्षों में हरियाणा-पंजाब के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय जल संसाधन मंत्रियों के बीच 7 उच्चस्तरीय बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन हर बार नतीजा शून्य रहा।
उन्होंने सवाल उठाया,
“जब मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री स्तर की सात बैठकों से कोई समाधान नहीं निकला, तो अधिकारी स्तर की बैठकें कौन-सा तीर मार लेंगी?”
विद्रोही ने चंडीगढ़ बैठक के बाद हुई साझा प्रेसवार्ता का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत मान का यह कहना कि पहले यह तय हो कि पंजाब के पास हरियाणा को देने के लिए कितना अतिरिक्त पानी है, दरअसल एसवाईएल नहर निर्माण से इनकार करने का परोक्ष तरीका है।
उन्होंने कहा कि जब पंजाब मुख्यमंत्री पहले ही पानी की उपलब्धता को शर्त बना रहे हैं, तो फिर अधिकारियों की कमेटी बनाकर बैठक करने का क्या औचित्य है?
“यह पूरी कवायद सिर्फ समय काटने और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को टालने की है।”
वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार, हरियाणा की भाजपा सरकार और पंजाब की आप सरकार की आपसी मिलीभगत साफ दिखाई दे रही है, जो हरियाणा की जनता के साथ खुली धोखाधड़ी है।
उन्होंने कहा कि एसवाईएल हरियाणा के हक का पानी है, लेकिन राजनीतिक स्वार्थों के चलते इसे लगातार दबाया जा रहा है।







