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गुरुग्राम। देश की राजधानी नई दिल्ली से सटे एनसीआर क्षेत्र के प्रमुख शहर साइबर सिटी गुरुग्राम के अर्जुन नगर क्षेत्र में हालात दिन-प्रतिदिन बद से बदतर होते जा रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कॉलोनी समस्याओं के बोझ तले दबी हुई है, लेकिन न तो सरकार सुन रही है और न ही प्रशासन।
स्थानीय लोगों ने बताया कि सरकारी स्कूल को नए सिरे से बनाने के नाम पर तीन से चार वर्ष पूर्व तोड़ दिया गया था, लेकिन आज तक उसका पुनर्निर्माण शुरू नहीं हो सका। बच्चों की शिक्षा से खिलवाड़ करते हुए स्कूल की ज़मीन आज कूड़े-कचरे का अड्डा बन चुकी है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों का जीवन दूभर हो गया है।
निवासियों का कहना है कि चुनाव के समय अर्जुन नगर में वोट मांगने कई नेता आते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही सभी गायब हो जाते हैं। स्कूल की ग्रांट पास होने के बाद अब विपक्ष को भी इस मुद्दे की याद आने लगी है।

स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि बीते पाँच वर्षों तक भाजपा के बड़े नेता और विपक्ष के नेता — जिनमें मोहित ग्रोवर, पंकज डावर आदि शामिल हैं — आखिर कहाँ थे? आज जब बजट को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ा तो सभी अचानक सक्रिय होकर “ड्रामा” करने अर्जुन नगर पहुँच गए।
लोगों ने कांग्रेस नेताओं से भी तीखे सवाल पूछे और कहा कि जब पिछले पाँच वर्षों में वे एक बार भी यहाँ नहीं आए, तो अब जनता के बीच आने का औचित्य क्या है? आज अर्जुन नगर में साफ़ देखने को मिला कि जनता पक्ष और विपक्ष दोनों से जवाब मांग रही है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सरकार और नगर निगम की निष्क्रियता जनता पर भारी पड़ रही है। उन्होंने मांग की कि स्कूल की ज़मीन पर तत्काल चारदीवारी कराई जाए और उसके भविष्य को लेकर स्पष्ट निर्णय लेकर निर्माण कार्य शीघ्र शुरू किया जाए।
वहीं एक अन्य स्थानीय व्यक्ति ने आरोप लगाया कि जब भी किसी कार्य का बजट पास हो जाता है और काम शुरू होने की स्थिति बनती है, तब पंकज डावर कुछ मीडिया कर्मियों के साथ मौके पर पहुँचकर विरोध का नाटक शुरू कर देते हैं, ताकि जनता को यह भ्रम दिया जा सके कि कार्य उनके दबाव के बाद हुआ है। जबकि पिछले पाँच वर्षों में वे एक बार भी अपनी टीम के साथ यहाँ नहीं आए। सवाल यह है — ऐसा क्यों?
अंततः सवाल वही है — कब बनेगा अर्जुन नगर का स्कूल?







