गिरदावरी-गिरदावरी के खेल में लटकाया जा रहा है फसलों को हुए नुकसान के मुआवजा: कुमारी सैलजा

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कहा-मुआवजा के नाम पर किसानों को दी जा रही है तारीख पर तारीख

चंडीगढ़, 29 नवंबर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि पहले तो प्रदेश की सरकार ने किसानों को पोर्टल-पोर्टल के खेल में उलछाया हुआ है तो फसलों को हुए नुकसान के मुआवजे के नाम गिरदावरी- गिरदावरी खेल रही है। मुआवजे के नाम पर किसानों को अभी तक तारीख पर तारीख दी जा रही है। अभी तक गिरदावरी का काम पूरा नहीं हुआ तो मुआवजा कैसे मिल सकता है। किसानों के साथ मजाक करने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। हरियाणा में बाढ़ की आपदा को पूरे छह माह बीत जाने के बावजूद किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है। व्यापक नुकसान के बावजूद प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को राहत राशि से वंचित रखना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

मीडिया को जारी बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि किसानों के साथ प्रदेश की भाजपा सरकार जो खेल खेल रही है उससे साफ लग रहा है कि बाढ़ और बारिश से फसलों को हुए नुकसान के मुआवजे के लिए किसानों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। अब सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि कुछ जिलों में गिरदावरी के कार्य में गड़बड़ी सामने आने के बाद अब दोबारा से क्रॉस जांच के आदेश दिए गए हैं। इस रिपोर्ट के बाद ही अब मुआवजे का फैसला हो सकेगा यानि मुआवजे को लेकर सरकार गंभीर नहीं हैं। हरियाणा राजस्व एवं आपदा विभाग ने फतेहाबाद और अन्य दो-तीन जिलों में रेडंम डाटा की जांच में पाया गया कि वहां बुवाई से अधिक फसलों के नुकसान का ब्योरा सामने आया है। हाल ही में अंतिम गिरदावरी और सत्यापन के कार्य में करीब 11 लाख एकड़ में नुकसान का आकलन किया गया था। इस नुकसान के मुआवजे के लिए करीब 600 से 800 करोड़ रुपये की जरूरत का अनुमान लगाया गया था। अब असल स्थिति दोबारा से जांच के बाद ही पता चलेगी। अभी तक 63 लाख 4 हजार 139 एकड़ फसलों की रिपोर्ट पटवारियों के स्तर पर लंबित है। प्रदेश में करीब 31 लाख 234.64 एकड़ क्षेत्रफल में किसानों ने क्षतिपूर्ति पोर्टल पर नुकसान का ब्योरा दर्ज कराया था। क्रॉस जांच के आदेश के बाद अभी तक कानूनगो स्तर पर 6 लाख 44 हजार 276.44 एकड़, एसडीएम स्तर पर 2 लाख 64 हजार 666.96 एकड़, जिला राजस्व अधिकारियों के स्तर पर 57 हजार 900.38 एकड़ और मंडलायुक्त स्तर पर 24 हजार 39.34 एकड़ सत्यापन कार्य लंबित है।

सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि आखिर किसानों को मुआवजे के लिए कब तक इंतजार करना होगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पहले दिवाली तक मुआवजा देने का आश्वासन दिया था। जब प्रदेश में किसानों को हुए नुकसान को लेकर सितंबर में ही काम शुरू हो गया था। यह कार्य पूरा हो गया ऐसा दावा भी किया गया था पर कोई न कोई बहाना बनाकर मुआवजा देने में देरी की जा रही है।

सांसद ने सरकार से मांग की है कि सभी जिलों की दोबारा गिरदावरी रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक की जाए, बाढ़ प्रभावित किसानों का मुआवजा बिना किसी देरी के, एकमुश्त जारी किया जाए, गिरदावरी में गड़बड़ी करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई हो, लेकिन किसानों का पैसा न रोका जाए और राज्य सरकार किसानों के हितों की अनदेखी बंद करे और राहत प्रक्रिया में समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करे। सांसद ने कहा कि किसान इंतजार-इंतजार करते थक चुके हैं। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं, लेकिन सरकार की फाइलें अभी भी चल रही हैं। यह असंवेदनशीलता नहीं तो और क्या है?सैलजा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाया तो वे किसानों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर संघर्ष खड़ा करेंगी।

हरियाणा में मासिक धर्म का सबूत मांगना अमानवीय: कुमारी सैलजा

हरियाणा में महिला कर्मचारियों से मासिक धर्म का सबूत मांगे जाने पर सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह कदम महिला गरिमा, निजता और सम्मान का सीधा उल्लंघन है। कुमारी सैलजा ने याद दिलाया कि जहां कर्नाटक सरकार महिलाओं को मासिक धर्म अवकाश दे रही है, वहीं हरियाणा की भाजपा सरकार उनसे अपमानजनक प्रक्रियाएँ पूरी करवाने पर मजबूर कर रही है। सांसद ने मांग की कि हरियाणा में तुरंत कर्नाटक मॉडल लागू किया जाए, ताकि महिलाओं को सुरक्षित, संवेदनशील और सम्मानजनक कार्य वातावरण मिल सके।

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Author: Bharat Sarathi

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