दिल्ली से जयपुर तक 195 किमी मार्ग पर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस हाईवे बनेगा

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नेशनल हाईवे 48 से करीब 15 से 20 किलोमीटर की दूरी पर बनाया जाएगा 

दिल्ली-जयपुर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस हाईवे के लिए 423 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहण

हाईवे का निर्माण कार्य  जिला गुरुग्राम में द्वारका एक्सप्रेस-वे से शुरू हो चुका

जिला अनुसार जमीन का अधिगृहण कार्रवाई के लिए प्रसासन तैयारी में जुटा

फतह सिंह उजाला 

गुरुग्राम / पटौदी । दिल्ली जयपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस हाईवे के लिए कुल 423 गांवों की जमीन अधिग्रहण की जाएगी। इसके लिए गांवों को चिन्हित कर सूची तैयार कर ली गई है, जो कि जल्द अमल में लाई जाएगी। हाईवे का निर्माण कार्य  जिला गुरुग्राम में द्वारका एक्सप्रेस  वे से शुरू हो चुका  है,  तथा जिला अनुसार जमीन का अधिगृहण शुरू किया गया है।  इसके चलते जल्द  कार्रवाई के लिए प्रसासन तैयारी में जुटा है।

दिल्ली से जयपुर तक 195 किमी  मार्ग पर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस हाईवे बनाया जाएगा। जमीन के लिए सर्वे कार्य बहुत पहले हो चुका है। भारतीय राष्ट्रीय  राजमार्ग प्राधिकरण ने हर जिले के लिए एसडीएम को भू अधिग्रहण सक्षम अधिकारी बनाया है । इसके लिए प्राधिकरण द्वारा एसडीएम कार्यालय को पत्र भेजा गया है। चिन्हित गांवों की सूचि भेजने के बाद अधिग्रहण की गई जमीनों का गजट नोटिफिकेशन किया जा सकेगा। 

दिल्ली-जयपुर के बीच 2 से 3 घंटे का सफर

एक्सप्रेस हाईवे प्रस्तावित होने से जयपुर-दिल्ली की महज दो से तीन घंटे में दूरी तय की जा सकेगी। जिसको लेकर लोगों में जमीनों के अधिग्रहण होने से चर्चा शुरू हो गई है।  जिसका सर्वे होने के साथ निशान भी लगाए जा चुके हैं।  नए सिरे से अब कार्रवाई शुरू होने के बाद लोगों में उत्सुकता बनी हुई है।नेशनल हाईवे संख्या 8 जो कि अब नेशनल हाईवे 48 के नाम से जाना जाता है। इसके करीब 15 से 20 किलोमीटर दूर बनाया जाएगा ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस हाईवे। यह नया हाइवे नेशनल हाईवे 48 के समानांतर चलेगा।

इन गांवों की जमीन का होगा अधिग्रहण 

सात जिलों के लगभग 423 गांवों की जमीन इसमें जाएगी। गुरुग्राम जिले के गढ़ी हरसरू, साढ़राणा बमरीपुर, सैयद मोहम्मद पुर, चांद नगर, फाजलपुर, जोनियावास, बासुंडा, महचाना , नूरगढ, राम नगर, हालियाकी , झज्जर जिले  के लुहारी , पटौदा, रेवाड़ी जिले के चौकी, आशियाकी गौरावास, नांगलिया रणमोख, टहना दीपालपुर, मस्तापुर, मुंडावास, बालावास जमापुर, रोलियावास, चिमनावास, पीथडावास , कुंडल  तथा जिला महेंद्रगढ़ के गांव मोरुंड, नियामत पुर, राय मलिकपुर, ढाणी प्रेमा शामिल है। जिला अलवर के कालियाहोड़ा, कांकरछाजा, कृष्णनगर, खडख़ड़ा, खापरिया, खेडक़ी, गंड़ाला, गादोज, गूंती, चकमुरादपुर, चांदीचाना, जयसिंहपुरा, झारोड़ा, ढ़ीढ़ोर, ढुंढ़ारिया, तसींग, नालोता, नारेडक़ला, नासरपुर, बहरोड़ तर्फ गंगाबिशन, नैनसुख, बिघाना, बुढ़वाल, भिटेड़ा, भूपसेड़ा, मांचल, मावड़ी, मिलकपुर, मुंडिय़ाखेड़ा, मौहम्मदपुर, नांगलिया, रामसिंहपुरा, रिवाली, सोरवा, हमजापुर, हमींदपुर गांवों का नाम सूचि में शामिल  है। आगे जिला सीकर और जिला जयपुर के गांव की जमीन भी अधिग्रहण में आएगी। उसके लिए सर्वे का कार्य चल रहा है।  जिला जयपुर में चंदवाजी  में जाकर यह खत्म हो जाएगा। इसका फाइनल रूट मैप ओर एलाइनमेंट भी आ गया है जिसका सेटेलाइट मैप यहां साझा किया जा रहा है। 

दोनों हाईवे के मध्य होगे ये शहर  

पटौदी, रेवाड़ी, बहरोड़, नीमराना, कोट पुतली, पावटा, शाहपुरा आदि शहर इन दोनों नए व पुराने हाइवे के मध्य रहेंगे। दिल्ली से जयपुर ग्रीन एक्सप्रेस वे के लिए तैयारियां एनएचएआई प्रशासन द्वारा पिछले दो साल से की जा रही है। ग्रीन एक्सप्रेस वे जिसका नाम 352 बी रखा गया है ,  राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या नेशनल हाईवे 48(पुराना नेशनल हाईवे 8) के मध्य  ये सभी शहर रहेंगे। दोनों हाईवे की दूरी करीब पंद्रह से बीस किलोमीटर का अंतर रहेगा। हालांकि कही कही यह अंतर 5 किलोमीटर भी रहेगा।  

दुर्घटनाओं में कमी भी आएगी

राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 पर दिल्ली-जयपुर के लिए प्रतिदिन एक लाख के करीब वाहनों का आवागमन बना रहता है। जिसके चलते दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। तथा जगह जगह जाम की भी भयंकर समस्या होती है।ग्रीन एक्सप्रेस वे के निर्माण के बाद वाहन डायवर्ट होने से एनएच आठ पर दबाव कम हो जाएगा। जिससे दुर्घटनाओं में कमी आने के साथ यात्रा समयावधि में  भी कमी आएगी।

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Author: Bharat Sarathi

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