बिजली-पानी को तरस रही जनता, हर मोर्चे पर विफल सरकार : अशोक अरोड़ा

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निजीकरण पर मुख्यमंत्री के रुख पर उठाए सवाल, कहा—जनता को बरगलाना बंद करे सरकार

भाजपा संगठन मजबूत करने से पहले जरूरी सेवाएं बहाल करने पर दे ध्यान

कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक, 23 अक्टूबर। थानेसर के विधायक एवं हरियाणा के पूर्व कैबिनेट मंत्री अशोक अरोड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार की नाकामी के कारण प्रदेश की जनता बिजली और पानी के लिए तरस रही है। उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारियों ने हड़ताल का अल्टीमेटम पहले ही दे दिया था। इसके बावजूद सरकार ने न तो समय रहते बातचीत कर समाधान निकाला और न ही पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था की।

अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अरोड़ा ने कहा कि सरकार की उदासीनता का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। इस अवसर पर कांग्रेस के शहरी प्रधान विवेक मेहता विक्की, ग्रामीण प्रधान सुनील राणा, जिला महासचिव टेकचंद बारना और नगर पार्षद परमवीर सिंह प्रिंस मौजूद थे।

निजीकरण पर कथनी-करनी में विरोधाभास का आरोप

अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री और बिजली मंत्री स्वयं को निजीकरण के खिलाफ बता रहे हैं, जबकि प्रदेश के दो जिलों में निजी कंपनी को बिजली वितरण की अनुमति दिए जाने से उनके रुख पर सवाल उठते हैं। उन्होंने सवाल किया कि सरकार की सहमति के बिना ऐसा फैसला कैसे हो सकता है।

उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर जनता को बरगलाने का आरोप लगाते हुए हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग के फैसले को रद्द कराने की मांग की। अरोड़ा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के पास इस फैसले को रद्द करने की शक्ति है और सरकार को कर्मचारियों तथा जनता के हित में कदम उठाना चाहिए।

परेशानी लेकर कहां जाए जनता

अरोड़ा ने कहा कि कुरुक्षेत्र में बिजली आपूर्ति बाधित होने से पेयजल संकट भी गहरा गया है। उनके अनुसार, कई घरों में पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं है और बिजली के बिना दैनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि उपायुक्त से बात करने पर तैयारियों और कार्रवाई का आश्वासन दिया जा रहा है। पानी की कमी पर टैंकर भेजने की बात भी कही जाती है, लेकिन लोगों को पर्याप्त राहत नहीं मिल रही। उन्होंने सवाल किया कि जब समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा तो जनता अपनी परेशानी लेकर किसके पास जाए।

संगठन से पहले जनता की चिंता करे भाजपा

भाजपा संगठन की बैठक पर सवाल उठाते हुए अरोड़ा ने कहा कि सरकार को संगठन मजबूत करने से पहले जनता की बुनियादी जरूरतों की चिंता करनी चाहिए। जिन लोगों ने सरकार को चुना है, उनके प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए बिजली-पानी जैसी आवश्यक सेवाएं बहाल करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

अरोड़ा ने दावा किया कि कुरुक्षेत्र समेत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पानी की टंकियां खाली पड़ी हैं। कुछ स्थानों पर इंजन लगाकर पानी पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सभी घरों तक आपूर्ति नहीं हो पा रही। उन्होंने कहा कि परेशान लोग जगह-जगह सड़क जाम कर विरोध जता रहे हैं। सरकार को स्थिति की गंभीरता समझते हुए तत्काल राहत देनी चाहिए और बिजली के निजीकरण पर रोक लगानी चाहिए।

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Author: Bharat Sarathi

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