गुरुग्राम में बिजली संकट के लिए भाजपा सरकार जिम्मेदार: डावर

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निजीकरण का फैसला वापस लेने और कर्मचारियों से बातचीत कर आपूर्ति बहाल कराने की मांग

गुरुग्राम। कांग्रेस जिला अध्यक्ष (शहरी) पंकज डावर ने बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बीच गुरुग्राम में बिजली आपूर्ति बाधित होने के लिए भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर सरकार के फैसले और कर्मचारियों के विरोध की अनदेखी से शहर में गंभीर संकट पैदा हुआ है। बिजली के साथ पानी की आपूर्ति प्रभावित होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

डावर ने दावा किया कि जिले के करीब साढ़े आठ लाख बिजली उपभोक्ताओं में से लगभग पांच लाख उपभोक्ता बिजली संकट से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा की आर्थिक राजधानी में घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर औद्योगिक इकाइयों तक का कामकाज बाधित है, लेकिन सरकार समाधान के लिए गंभीर प्रयास नहीं कर रही।

सोहना और गांवों में भी संकट

पंकज डावर के अनुसार, सोहना के दो बड़े पावर हाउसों के 12 फीडर बंद होने से शहर और आसपास के 30 से अधिक गांवों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने दावा किया कि सर्कल-एक के 12 और सर्कल-दो के 14 फीडर सुबह से बंद रहने के कारण लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।

औद्योगिक उत्पादन प्रभावित होने का दावा

डावर ने कहा कि दौलताबाद, कादीपुर और सेक्टर-37 जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली संकट से उत्पादन प्रभावित हुआ है। उन्होंने दावा किया कि 1,650 से अधिक फैक्ट्रियों में कामकाज ठप होने से करीब 3,400 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। लगातार बिजली बंद रहने से कच्चा माल खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है।

बिजली के साथ पानी की परेशानी

कांग्रेस नेता ने कहा कि लंबे समय तक बिजली नहीं आने से घरों के इन्वर्टर भी जवाब दे गए और पानी की आपूर्ति बाधित हो गई। उनके अनुसार, सुबह नौ बजे से शाम छह बजे के बीच दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के टोल-फ्री नंबर पर पांच हजार से अधिक शिकायतें की गईं, लेकिन लोगों को राहत नहीं मिली।

डावर ने दावा किया कि सर्कल-एक के 826 कर्मचारियों में से 816 और सर्कल-दो के 557 कर्मचारियों में से 548 हड़ताल पर रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पावर हाउसों पर पुलिस तो तैनात कर दी, लेकिन बिजली आपूर्ति बहाल करने और जनता को स्पष्ट जानकारी देने की प्रभावी व्यवस्था नहीं की।

उन्होंने मांग की कि सरकार निजीकरण का फैसला तत्काल वापस ले और कर्मचारी संगठनों से बातचीत कर गतिरोध दूर करे, ताकि बिजली-पानी की आपूर्ति और औद्योगिक गतिविधियां सामान्य हो सकें।

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Author: Bharat Sarathi

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