समानांतर बिजली लाइसेंस रद्द करे सरकार: संपत सिंह

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को इनेलो का समर्थन, संयुक्त संघर्ष मोर्चा से बातचीत की मांग

चंडीगढ़, 22 अक्टूबर। हरियाणा के पूर्व वित्त मंत्री एवं इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने का विरोध करते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेशव्यापी हड़ताल से पहले सरकार बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं के संयुक्त संघर्ष मोर्चा से सार्थक बातचीत करे। इस मुद्दे पर इनेलो कर्मचारियों के आंदोलन का पूरा समर्थन करती है।

वीरवार को चंडीगढ़ स्थित इनेलो मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रो. सिंह ने आरोप लगाया कि हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग की ओर से इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को 25 वर्षों के लिए लाइसेंस देने का फैसला सार्वजनिक बिजली निगमों को कमजोर करेगा। उनके मुताबिक, इससे लाभकारी क्षेत्रों की आय निजी कंपनी के पास जाने और सरकारी निगमों पर खर्च तथा घाटे का बोझ बढ़ने का खतरा है।

सरकार की अपील की घोषणा पर उठाए सवाल

प्रो. संपत सिंह ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज की ओर से आयोग के आदेश के खिलाफ अपील करने संबंधी बयानों पर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 के तहत जनहित में स्पष्ट लिखित नीतिगत निर्देश जारी करें और लाइसेंस रद्द कराने के लिए तत्काल कदम उठाएं।

उन्होंने दावा किया कि इनेलो ने निजी कंपनियों के आवेदन के समय भी आपत्तियां दर्ज कराई थीं और आयोग में सुनवाई के दौरान भी विरोध किया था। इसके बावजूद निजी कंपनी को लाइसेंस दे दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के प्रभाव में लिया गया और कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए उसकी वित्तीय क्षमता के आकलन में उदारता बरती गई।

कंपनी की वित्तीय पात्रता पर सवाल उठाते हुए प्रो. सिंह ने दावा किया कि महज एक करोड़ रुपये की पूंजी वाली कंपनी को करीब 4,700 करोड़ रुपये की परियोजना का लाइसेंस दिया गया। उन्होंने कंपनी के मूल्यांकन के लिए अपनाए गए आधार की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए।

सरकारी निगम की आय प्रभावित होने की आशंका

प्रो. सिंह के अनुसार, गुरुग्राम से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को लगभग 9,493 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है, जो उसके कुल राजस्व का 42.98 प्रतिशत है। उन्होंने दावा किया कि यहां वितरण हानि केवल 4.7 प्रतिशत है। ऐसे लाभकारी क्षेत्र में निजी कंपनी के प्रवेश से सरकारी निगम की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने कहा कि अधिक बिजली खपत वाले व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ता निजी कंपनी की ओर चले गए तो किसानों, ग्रामीण परिवारों और छोटे उपभोक्ताओं को रियायती बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। उनके आकलन के अनुसार, निगम को सालाना लगभग 3,000 करोड़ रुपये की क्रॉस-सब्सिडी हानि और संभावित रूप से 4,272 करोड़ रुपये तक के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

प्रो. सिंह ने आशंका जताई कि बकाया ईंधन अधिभार और बिजली नेटवर्क की स्थायी लागत का बोझ अंततः घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों तथा छोटे दुकानदारों पर पड़ सकता है। उन्होंने कर्मचारियों और अभियंताओं की नौकरी एवं सेवा सुरक्षा पर भी चिंता व्यक्त की।

जनता के निवेश की सुरक्षा का सवाल

पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी बिजली निगमों की आर्थिक स्थिति सुधारने और बुनियादी ढांचा मजबूत करने के लिए बड़ी मात्रा में सार्वजनिक धन खर्च किया गया है। उन्होंने उदय योजना के तहत ऋण का बोझ सरकार द्वारा उठाए जाने, अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध कराने और गुरुग्राम स्मार्ट ग्रिड में निवेश का उल्लेख करते हुए कहा कि इस व्यवस्था को कमजोर करना जनहित के विपरीत होगा।

प्रो. सिंह ने दावा किया कि वर्ष 1999 में इनेलो सरकार ने भी सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देते हुए बिजली वितरण के निजीकरण की दिशा में लिए गए निर्णय को पलटा था। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों का उद्देश्य जनता को भरोसेमंद सेवाएं देना होना चाहिए।

बिजली कर्मचारियों, अभियंताओं और किसान संगठनों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि सार्वजनिक बिजली व्यवस्था की रक्षा के लिए इनेलो कानूनी और राजनीतिक स्तर पर संघर्ष करेगी तथा जरूरत पड़ने पर अदालत से सड़क तक इस मुद्दे को उठाएगी।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

और पढ़ें